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खालसा में सिख छात्रों को दाखिले में मिलेगा आरक्षण

Tue, 21 Jun 2016 01:25 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
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दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के श्री गुरु तेग बहादुर खालसा कॉलेज में वर्तमान शैक्षणिक सत्र में सिख छात्रों को दाखिले में 50 प्रतिशत आरक्षण मिलेगा। हाईकोर्ट ने साफ कर दिया कि कॉलेज प्रशासन अल्पसंख्यक आयोग द्वारा कॉलेज को प्रदान अल्पसंख्यक के दर्जे के तहत दाखिला देने के लिए स्वतंत्र है। अदालत ने दाखिलों पर लगाई गई रोक को हटा दिया।
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 न्यायमूर्ति जीएस सिस्तानी ने संक्षिप्त फैसले में कहा कि छात्रों के भविष्य व हित को देखते हुए दाखिलों पर रोक नहीं लगाई जा सकती। जब कॉलेज को अल्पसंख्यक कॉलेज का दर्जा देने में डीयू को आपत्ति नहीं है तो दाखिलों पर क्यों? अदालत ने याचिकाकर्ता से कहा कि आपका मुद्दा शिक्षकों की सेवा शर्तें प्रभावित होने का डर है और वे अगले आदेश तक उनकी सेवा शर्तें किसी भी हालत में प्रभावित नहीं होगी।

 इतना ही नहीं, अदालत ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि कॉलेज प्रशासन रिक्त शिक्षकों के पदों को भी अल्पसंख्यक दर्जे के तहत भर सकता है, लेकिन नियुक्तियां अदालत के अंतिम निर्णय पर प्रभावी मानी जाएगी। अदालत ने यह निर्देश कॉलेज को अल्पसंख्यक दर्जा दिए जाने के मामले पर आपत्ति संबंधी शिक्षकों की याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया। गौरतलब है कि शुक्रवार को अदालत ने कॉलेज में दाखिलों पर रोक लगाते हुए मात्र छात्रों की काउंसिलिंग करने की इजाजत दी थी।
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 अदालत ने याची के उस तर्क पर असहमति जताई कि कॉलेज प्रशासन दाखिला नीति में बदलाव नहीं कर सकता। याची ने यह भी तर्क रखा कि मामले में पहले डीयू ने ही अल्पसंख्यक आयोग के निर्णय को चुनौती दी थी, लेकिन अब इस प्रकार वह याचिका वापस नहीं ले सकता। अदालत ने कहा कि आपकी याचिका के अनुसार, आप मात्र अपनी सेवा शर्तों में बदलाव पर संदेह जता रहे हैं।

कोर्ट ने कहा कि आप स्पष्ट करे कि बच्चों को दाखिला देने से आप की सेवा शर्तें कैसे प्रभावित होंगी। आप कॉलेज में एससी-एसटी के छात्रों का मुद्दे के आधार पर दाखिलों पर रोक की मांग नहीं कर सकते। अदालत ने उनके इस तर्क पर भी असहमति जताई कि कॉलेज की स्थापना अल्पसंख्यक कॉलेज के रूप में नहीं हुई। यदि अल्पसंख्यक आयोग ने इस कॉलेज को अल्पसंख्यक का दर्जा दिया है तो उसे डीयू ही चुनौती दे सकता है। आपका मुद्दा मात्र सेवा शर्तों का है।

क्या है मामला
गौरतलब है कि कॉलेज को अल्पसंख्यक का दर्जा देने को लेकर काफी अरसे से विवाद चल रहा है। याची वीना अग्रवाल का तर्क है कि इस कॉलेज में पाकिस्तान से आए लोगों को भी दाखिले का प्रावधान किया गया था और एससी-एसटी के छात्रों को दाखिल का भी प्रावधान है। यह कॉलेज मात्र सिख छात्रों के दाखिलों के लिए नहीं बना था। उनका तर्क है कि यदि कॉलेज को अल्पसंख्यक का दर्जा दिया गया तो एससी-एसटी का कोटा खत्म हो जाएगा।

अल्पसंख्यक आयोग ने भी इस कॉलेज को अल्पसंख्यक कॉलेज का दर्जा प्रदान कर दिया था। इसके बाद डीयू ने हाईकोर्ट में अपील की और इस निर्णय पर वर्ष 2012 में स्थगन आदेश मिल गया। इसके बाद सत्ता परिवर्तन के बाद डीयू ने अपना स्टैंड बदलते हुए कहा कि यदि कॉलेज को अल्पसंख्यक का दर्जा दिया जाता है तो उसे आपत्ति नहीं होगी। उधर, याची वीना अग्रवाल ने पहले ही अलग से याचिका दायर कर दी थी। उनका तर्क है कि यदि कॉलेज के अल्पसंख्यक दर्जे को आधार पर बनाकर दाखिला नीति तय करने का दावा किया जाता है तो यह गलत है। इससे सभी टीचर व एससी-एसटी कोटा प्रभावित होगा।
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