देशभर की स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए एचआरडी मिनिस्ट्री ने अब बीएड कॉलेजों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। मंत्रालय ने देशभर के साढ़े छह हजार बीएड कॉलेज को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
खास बात यह है कि अब बीएड कॉलेजों को हर साल सरकार को अपनी रिपोर्ट में बताना होगा कि वे क्या पढ़ाते हैं, कितनी फीस ले रहे हैं, दाखिला प्रक्रिया से लेकर पाठ्यक्रम की भी जानकारी देनी होगी।
मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावडेकर ने अमर उजाला के कार्यक्रम में बताया कि अब शिक्षा की गुणवत्ता स्कूली शिक्षा से सुधरेगी, जिसकी शुरुआत कर दी गई है। लर्निंग आउटकम में जहां बच्चे की पढ़ाई, सिखने से लेकर अभिभावक व शिक्षक की जिम्मेदारी तय की गई है, तो अब शिक्षकों को तैयार करने वाले बीएड कॉलेजों को भी जवाब देना होगा।
इसी तहत सरकार ने देशभर के बीएड कॉलेज से शपथपत्र मांगा था, जिसमें उन्हें सारी जानकारी देनी थी। हालांकि महज साढ़े छह हजार बीएड कॉलेज ने ही सरकार को जानकारी दी है। जिन बीएड कॉलेज ने जानकारी नहीं थी, उन्हें पिछले हफ्ते कारण बताओ नोटिस जारी हो चुका है।
बीएड कॉलेज शिक्षक बनाने के नाम पर मोटी फीस लेकर डिग्री नहीं बेच सकेंगे। बल्कि उन्हें किस आधार पर छात्र को दाखिला दिया, पाठ्यक्रम क्या है, ट्रेनिंग क्या दी गयी, इंफ्रास्ट्रक्चर आदि की डिटेल देनी पड़ेगी।
इसके बाद जब शिक्षक डिग्री लेने के बाद स्कूल में पढ़ाया तो उसका भी मूल्यांकन होगा। जो शिक्षक अच्छा नहीं पढ़ाएंगे, उनकी दोबारा ट्रेनिंग होगी।