दिल्ली यूनिवर्सिटी (डीयू) में ऑनलाइन दाखिला प्रक्रिया ने गुरुग्राम की छात्र राजनीति की चमक को फीकी कर दिया है। दाखिले के वक्त हेल्प डेस्क के सहारे साइबर सिटी में छात्र राजनीति चमकाने वाले छात्र नेताओं को इस बार मौका नहीं मिल पा रहा है।
आवेदन प्रक्रिया शुरू होने के एक सप्ताह होने के बावजूद सभी राजनीतिक पार्टियों के छात्र इकाइयाें की हेल्प डेस्क गायब हैं। नए छात्रों के बीच पैठ बनाना भी छात्र संगठनों के लिए चुनौती बनता जा रहा है।
सीबीएसई (केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड) के स्कूलों से निकलने वाले छात्रों के लिए डीयू में प्रवेश लेना पहली पसंद होता है। पिछले साल तक डीयू में दाखिले के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही शहर में छात्र राजनीति शुरू हो जाती थी।
जगह-जगह हेल्प डेस्क के जरिए फॉर्म भरने और डीयू के कॉलेज तक पहुंचने में छात्रों की मदद की जाती थी। मेट्रो स्टेशन और बस स्टैंड पर छात्र संगठनों के कार्यकर्ता नए छात्रों के लिए रहबर बनते थे। बाद में इन्हीं छात्रों से दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्र संघ (डूसू) चुनाव में वोट मांगते थे।
शुरू से जुड़ने का फायदा छात्र संगठनों को भी होता था। इस बार डीयू के ऑनलाइन दाखिले से छात्रों को भागमभाग से छुटकारा मिला है लेकिन इस व्यवस्था ने छात्र संगठनों के लिए अब रहबरी का रास्ता बंद कर दिया है। बता दें कि पिछले साल डीयू के विभिन्न कॉलेजों मेें गुरुग्राम के करीब 5000 छात्रों ने दाखिला लिया था।
आवेदन नहीं तो दाखिला प्रक्रिया में मदद करेंगे छात्र संगठन
छात्रों के रहबरी के जरिए छात्र संगठन पूरा डाटा भी तैयार करते थे। जिसमें कौन से कॉलेज में छात्र जाने वाला है? कौन से कोर्स में रुचि है? छात्र की हॉबी क्या है? घर का पता, मोबाइल नंबर आदि सभी इकट्ठा करते थे।
इससे कक्षा शुरू होने के बाद उन्हें अपने संगठन से जोड़ने में मदद मिलती थी। साथ ही डूसू चुनाव के वक्त मैसेज, फेसबुक और फोन के जरिए वोट मांगते थे। कई बार डूसू अध्यक्ष व महासचिव पद के उम्मीदवार विद्यार्थियों के घर तक पहुंच जाते थे।
एनएसयूआई के वरिष्ठ छात्र नेता नीरज यादव का कहना है कि ऑनलाइन होने से छात्रों को फायदा हुआ है। अब आवेदन करने में नहीं तो कॉलेज में दाखिला प्रक्रिया पूरी करने में मदद के लिए छात्र संघ तैयार है। जल्द ही कमेटी बनाई जाएगी।