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नर्सरी दाखिलाः स्कूल कर रहे अपनी मनमानी, ऐसे बदल रहे नियम

Sat, 30 Dec 2017 05:51 PM IST
रश्मि शर्मा/अमर उजाला, नई दिल्ली
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nursery admission - फोटो : अमर उजाला
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राजधानी में नर्सरी दाखिले की रेस रफ्तार पकड़ चुकी है। वहीं, स्कूलों की मनमानी भी चरम पर है। दरअसल, कुछ निजी स्कूलों ने दाखिले के 100 अंकों के फार्मूले को 130 से 300 अंकों तक का बना दिया।
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इसमें भी दूरी ( नेबरहुड) मानक को ही सारे अंक दे डाले हैं। इस तरह लिस्ट में उन्हीं बच्चों का नाम आएगा जो स्कूल के एक किलोमीटर के दायरे में रहते होंगे। ऐसे हैरान करने वाले फार्मूले से अभिभावक परेशान हैं।

 शालीमार बाग स्थित गुडले पब्लिक स्कूल ने सौ अंकों की जगह 350 अंकों का फार्मूला रखा है। हैरानी की बात यह है कि स्कूल ने (नेबरहुड) को कई श्रेणियों में बांट कर अधिकतम अंक इसी मानक को दिए हैं।
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एक किलोमीटर की दूरी पर रहने वाले अभिभावकों को 75, 1 से 3 वालों को 70, 3 से 6 किलोमीटर वालों के लिए 65 और 6 से 8 किलोमीटर वालों के लिए 60 अंक तय किए हैं। वहीं 8 से अधिक वालों ने को 55 अंक हैं। हालांकि, सिबलिंग व एल्युमिनी को 20 व 5 अंक दिए गए हैं। इस तरह से मानक को 325 अंक दे डाले हैं।

प्रभुदयाल पब्लिक स्कूल ने 319 अंकों का फार्मूला बनाया है। स्कूल ने पड़ोस मानक को चार अलग-अलग हिस्सों में बांट दिया है। वहीं, भाई-बहन के मानक को भी पड़ोस से जोड़ दिया है। स्कूल ने 0-1 किलोमीटर वालों के लिए 90 अंक, 1-3 किमी वालों के लिए 80 अंक, 3-6 किमी वालों के लिए 70 व 6 किलोमीटर से अधिक वालों के लिए 60 अंक निर्धारित किए हैं।

इसके बाद स्कूल ने भाई-बहन (सिबलिंग) मानक को लिया है। इसमें भी एक किलोमीटर के अंतर्गत रहने वाले भाई-बहन के लिए 10 अंक, 1-3 को 5 अंक, 3-6 किमी को 3 अंक व 6 किमी से अधिक के लिए 1 अंक निर्धारित किया है।

पीतमपुरा स्थित ब्रिलियंट कॉन्वेंट स्कूल ने 0-1 किमी के लिए 90 अंक, 1-3 को 70, 3-6 के लिए 50, व 6 किमी के लिए 30 अंक व सिबलिंग के लिए 10 अंक से 250 अंकों का फार्मूला बनाया है।

ऐसे ही लिटिल फैयरी स्कूल ने 280 अंकों, सेंट मार्गेट स्कूल ने 250 अंकों का फार्मूला बनाया है। वहीं, कुछ स्कूलों ने 130 और 150 अंकों का फार्मूला भी बनाया है।

मनमानी रोकने को बने कानून
ऑल इंडिया पैरेंट्स एसोसिएशन अध्यक्ष अशोक अग्रवाल का कहना है कि सरकार से स्कूलों को मानक तैयार करने की छूट मिली है। लिहाजा वह छूट का लाभ उठा रहे हैं। यदि स्कूल किसी एक मानक को ही दाखिले का आधार बना रहे हैं तो इससे एक अभिभावक को तो लाभ होगा दूसरे को नुकसान। स्कूलों की मनमानी रोकने के लिए कानून लाना चाहिए और सभी की लॉटरी की जानी चाहिए थी।
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