दिल्ली विश्वविद्यालय में अब छात्रों को विदेशी क्लासिक पुस्तकें (उत्कृष्ट ग्रंथ, कृतियां) पढ़ाने की तैयारी हो रही है। अगर कुलपति के विजन डॉक्यूमेंट को अमलीजामा पहनाया गया तो छात्र इन क्लासिक पुस्तकों का अनुवाद कॉलेज व स्कूल की लाइब्रेरी में पढ़ेंगे।
विदेशों की कृतियों को पढ़ाने के पीछे मुख्य उद्देश्य यह हैं कि इससे छात्रों के ज्ञान के भंडार को विकसित किया जाए सके। यह माना जा रहा है कि इन क्लासिक में से यदि दस कृतियों को भी उन्हें पढ़ने का मौका मिलता है तो उनका ज्ञान काफी समृद्ध हो जाएगा।
डीयू कुलपति प्रो. योगेश त्यागी ने बीते सप्ताह हुई एकेडमिक काउंसिल (एसी) की बैठक में अपने विजन डॉक्यूमेंट के विषय में काउंसिल के सदस्यों से चर्चा की थी। जिसमें उन्होंने बताया था कि विदेशों में कई ऐसी कृतियां हैं जिनका अनुवाद करके छात्रों को पढ़ाया जा सकता है।
एक एसी सदस्य ने बताया कि कुलपति का मानना है कि दुनिया भर में 200 से अधिक देश हैं। जिनके पास कृतियों व ग्रंथों का समृद्ध भंडार है। ऐसे में यदि उनमें से कुछ ही क्लासिक पुस्तकों का अनुवाद विश्वविद्यालय स्तर पर किया जाए तो इसका लाभ हो सकता है।
इसके लिए उनकी सोच है कि इनका अनुवाद हो और वह डीयू लाइब्रेरी व कॉलेज लाइब्रेरी में उपलब्ध कराया जाए। इससे छात्रों में न केवल पढ़ने की आदत का विकास होगा बल्कि देश के साथ-साथ विदेशों के विषय में भी जानने-समझने का अवसर मिलेगा। इस तरह से डीयू में ही समृद्ध ज्ञान पर आधारित संसार तैयार हो जाएगा।