दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव के नतीजों की वीडियो रिकॉर्डिंग व मशीन वाइज डाटा देखने के बाद भी छात्र संगठन एनएसयूआई संतुष्ट नहीं है।
ऐसे में अब एनएसयूआई ने न्याय के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने का फैसला किया है। एनएसयूआई का आरोप है कि वीडियो रिकॉर्डिंग व मशीन वाइज डाटा में पारदर्शिता नहीं बरती गई है।
मालूम हो कि एनएसयूआई के एक प्रतिनिधिमंडल से बैठक के बाद प्रशासन उम्मीदवारों को मशीन के आधार पर डाटा दिखाने व वीडियो रिकॉर्डिंग दिखाने को तैयार हो गया था।
बुधवार को प्रशासन ने एनएसयूआई के छात्रसंघ चुनाव के प्रत्याशियों को चुनाव की वीडियो रिकॉर्डिंग और मशीन वाइज डाटा देने के लिए बुलाया था।
एनएसयूआई पदाधिकारी निगम भंडारी, अजय छिकारा, विवेकानंद पाठक, दीपक नेगी व विकास छिकारा के साथ तीनों प्रत्याशी रिकॉर्डिंग देखने के लिए चुनाव अधिकारी कार्यालय पहुंचे। एनएसयूआई का कहना है कि सभी प्रत्याशियों को मशीन वाइज डाटा लिखित तौर पर दिया गया और वीडियो रिकॉर्डिंग दिखाई गई।
एनएसयूआई का कहना है कि दिखाई गए वीडियो में एक साथ बारह टेबल पर बारह मशीन रखी हुई थीं, लेकिन वीडियो कैमरा सिर्फ एक-दो मशीन पर ही अच्छे से था, जबकि चुनाव में कुल 140 मशीनों का उपयोग किया गया है।
एनएसयूआई का आरोप है कि वहीं मशीन वाइज डाटा देखा तो उसमें कई पेपर पर 10 सितंबर की बजाय 9 सितंबर लिखा हुआ था, कई में सिर्फ एक सदस्य के ही हस्ताक्षर कराए गए हैं।
उन्होंने धांधली का आरोप लगाते हुए कहा कि लगता है कि कुछ लोगों ने मिलकर इस दस्तावेज को तैयार किया है। ऐसे में अब न्याय के लिए हाईकोर्ट जाने का फैसला किया है।