जिले के सरकारी स्कूलों में नया शैक्षणिक सत्र एक अप्रैल से शुरू हो चुका है, लेकिन अब तक विद्यार्थियों के हाथ में किताबें नहीं आई है। ऐसे में पहली कक्षा में दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों को पुरानी पाठ्यपुस्तक के साथ पढ़ाई करवाई जा रही है। वहीं इस बार अन्य कक्षाओं में कैचअप प्रोग्राम के माध्यम से पिछली कक्षा का पाठ्यक्रम पढ़ाया जा रहा है।
अधिकांश स्कूलों में यह बात सामने आ रही है कि विद्यार्थी एक साल तक पढ़े हुए पुराने पाठ्यक्रम की किताबें अगले दो महीने तक पढने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। इसी वजह से स्कूलों में इन दिनों नामांकन कम देखने को मिल रहा है। वह बच्चों द्वारा शिक्षकों ने नई किताबों की मांग की जा रही है।
शिक्षक संघ के अनुसार यह प्रोग्राम पिछली कक्षा में कमजोर रहे विद्यार्थियों की परफॉर्मेंस को सुधारने में तो कारगर साबित होगा, लेकिन जो छात्र कक्षा में अव्वल रहे हैं वे नई कक्षा में पुराने पाठ्यक्रम को पढने में दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं। वहीं बच्चों की कम संख्या से कौशल पासबुक तैयार करने का कार्य भी प्रभावित होकर रह गया है। जिले में पहली से आठवीं तक 371 स्कूल हैं, जिसमें करीब 70 हजार विद्यार्थी शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। इन सभी विद्यार्थियों को पुरानी पाठ्यपुस्तक थमाई गई है।
कैचअप प्रोग्राम के जरिये गुणवत्ता में सुधार
जानकारी के अनुसार पिछले वर्ष शिक्षा विभाग की तरफ से सरकारी स्कूलों में किताबें पहुंचाई गई थी, जिसका पाठ्यक्रम बदलने की मांग अभिभावकों व शिक्षकों की ओर से की गई है। ऐसे में विभाग ने इन दिनों कैचअप प्रोग्राम चला दिया है ताकि बच्चा अपनी कमी को दूर कर सके। इस दौरान तीसरी कक्षा के बच्चों को दूसरी कक्षा का पाठ्यक्रम पढ़ाया जा रहा है, ताकि उनका कौशल पता किया जाए।
मई के अंत तक किताबें आ जाएंगी। एक जुलाई से बच्चें नई किताबों से पढ़ाई करेंगे। फिलहाल विद्यार्थियों के लिए स्कूल में सीसीई व कैचअप प्रोग्राम चलाया गया है। जहां उसका पिछली कक्षा का ज्ञान पता किया जा रहा है।
-अनिता शर्मा, ब्लॉक शिक्षा अधिकारी