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डूसू चुनाव: नए बैलेट नंबर के पोस्टर ने बिगाड़ा छात्र संगठनों का खेल

Thu, 07 Sep 2017 09:48 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
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नए बैलेट नंबर आने से परेशान छात्र नेता - फोटो : अमर उजाला
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दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव के लिए नाम वापस लेने के बाद अध्यक्ष पद के लिए जारी नई सूची नेे संगठनों का खेल बिगाड़ दिया है। बुधवार को संगठनों के पैनल को मिले बैलेट नंबर रातों-रात बदल गए।
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बुधवार को एबीवीपी के पैनल को 5,5,3,4 बैलेट नंबर मिले थे, लेकिन बृहस्पतिवार को बैलेट नंबर 8, 5, 3, 4 हो गया। इसी तरह से आइसा, इनसो के बैलेट नंबर भी बदल गए हैं। बैलेट नंबर बदलने से सबसे ज्यादा नुकसान छात्र संगठन एबीवीपी को हुआ है।  


एबीवीपी ने बुधवार को आवंटित बैलेट नंबर के आधार पर प्रचार शुरू कर दिया था। उन नंबरों के आधार पर ही पूरे कैंपस व दिल्ली में पोस्टर-बैनर लग गए थे। सोशल मीडिया से लेकर अन्य माध्यमों से प्रचार इन्हीं आवंटित नंबरों से किया जा रहा था, लेकिन बुधवार रात दो बजे के बाद प्रशासन ने नाम वापस लेने के बाद अध्यक्ष पद के लिए नई सूची जारी कर दी।
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बुधवार शाम जो सूची जारी की गई थी उसमें 6 उम्मीदवार अध्यक्ष पद की रेस में थे। आधी रात के बाद जारी सूची में अध्यक्ष पद की रेस में कुल 9 उम्मीदवार आ गए। इसी कारण संगठनों को मिले बैलेट नंबर बदल गए।
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बदल गया उम्मीदावरों का नंबर

पुराने बैलेट नंबर के पोस्टरों को निकाला जा रहा है - फोटो : अमर उजाला
एबीवीपी के अध्यक्ष पद के उम्मीदवार रजत चौधरी को पहले बैलेट नंबर पांच मिला था लेकिन अब उनका बैलेट नंबर 8 हो गया। बताया जा रहा है इससे अनुमानित एबीवीपी को लाखों का नुकसान हुआ है। इसी तरह से आइसा की अध्यक्ष पद की उम्मीदवार पारुल चौहान को बैलेट नंबर 3 मिला था जो कि अब बदलकर 5 हो गया है।  


इनसो के अध्यक्ष पद के उम्मीदवार कुणाल सिंह का बैलेट नंबर दो था जो कि अब चार हो गया है। बताया जा रहा है कि इसको लेकर संगठनों की ओर से डूसू चुनाव कार्यालय में आपत्ति दर्ज कराई गई है। एबीवीपी के राष्ट्रीय मीडिया संयोजक साकेत बहुगुणा ने कहा कि बुधवार को जो बैलेट नंबर दिए गए उसके आधार पर प्रचार शुरू कर दिया गया था।


कैंपस में उसी आधार पर पोस्टर बैनर लगे थे लेकिन अब पोस्टर पर बैलेट नंबर बदलवाने पड़ेंगे। हालांकि सोशल मीडिया पर तो नए बैलेट नंबर से प्रचार शुरू कर दिया है। प्रचार के लिए सिर्फ शुक्रवार तक का ही समय होने के कारण संगठनों को ज्यादा दिक्कत हो रही है।  


 
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