हाईकोर्ट ने जेएनयू प्रसाशन को अनुशासनहीनता के आरोप में दोषी ठहराए गए छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया, उमर खालिद, अनिर्बान भट्टाचार्य सहित अन्य छात्रों के खिलाफ अगले आदेश तक कार्रवाई न करने संबंधी अवधि सात नवंबर तक बढ़ा दी।
न्यायमूर्ति संजीव सचदेव ने यह आदेश कन्हैया व अन्य की उस याचिका पर दिया है, जिसमें जेएनयू में 9 फरवरी के विवादास्पद मामले में अपील अथॉरिटी के निर्णय को चुनौती दी गई है।
संबंधित अथॉरिटी ने जेएनयू प्रशासन के उस फैसले को बरकरार रखा था, जिसमें छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार सहित 19 को अनुशासनहीनता के आरोप में दोषी ठहराते हुए उनके निलंबन की सजा को बहाल किया गया।
कन्हैया, उमर खालिद व अनिर्बान भट्टाचार्य की और से पेश अधिवक्ता ने अपीलीय अथॉरिटी के फैसले को आधारहीन बताया। उन्होंने कहा कि अपीलीय अथॉरिटी द्वारा 22 अगस्त को दिया आदेश एक तरफ है।
उन्होंने कहा कि जेएनयू के कुलपति की अपील अथॉरिटी ने एक उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन किया था लेकिन जो मुद्दे उनके मुवक्किलों ने उठाए उन पर विचार ही नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि यह निर्णय एक तरफ है।