जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय कैंपस के अंदर एग्जीक्यूटिव काउंसिल (ईसी) की बैठक चल रही थी तो वहीं गेट पर सौ से अधिक पुलिस कर्मी तैनात थे। यह बैठक कन्वेंशन सेंटर में आयोजित होनी थी लेकिन वहां छात्रों और शिक्षकों के विरोध प्रदर्शन के चलते कुलपति ने आखिरी मौके पर स्थान बदलते हुए ऐड ब्लॉक स्थित अपने ऑफिस में आयोजित करवाई। हालांकि बैठक के दौरान शिक्षक और छात्र विरोध प्रदर्शन करते रहे।
जेएनयू कैंपस में मंगलवार को ढाई बजे कन्वेंशन सेंटर में ईसी बैठक आयोजित होनी थी। लेकिन छात्रों व शिक्षकों के विरोध के चलते, कुलपति समेत अन्य सदस्यों को प्रदर्शनकारी बंधक न बना लें या फिर पिछली ईसी में कुलपति से धक्का-मुक्की व अभद्र व्यवहार को देखते हुए विश्वविद्यालय प्रबंधन ने पहले ही दिल्ली पुलिस को फोन कर सुरक्षा व्यवस्था की मांग रखी थी। इसीलिए पुलिस के करीब सौ से अधिक कर्मी गेट के बाहर ही अंदर से अनुमति का इंतजार करते रहे।
इसी बीच बैठक से कुछ मिनट पहले कुलपति ने ईसी के सभी 35 सदस्यों को अपने ऑफिस फोन करके बुला लिया और बैठक कन्वेेंशन सेंटर की बजाय ऐड ब्लॉक में शुरू कर दी। ढाई बजे से करीब सात बजे तक ईसी की बैठक चलती रही और बाहर छात्रों व शिक्षकों का विरोध प्रदर्शन भी जारी रहा।
विरोध प्रदर्शन करने वाले तीन वर्गों में बंटे हुए थे। जेएनयू छात्रसंघ व शिक्षक यूनियन वाइवा के विरोध में थी। जबकि बापसा व ओबीसी फोरम नौ छात्रों का निलंबन रद्द करने समेत वाइवा के नंबर 30 से पंद्रह करने की मांग करती रही। जबकि तीसरा ग्रुप एबीवीपी का था, जिसमें सौरभ शर्मा ने यूजीसी के मई 2016 की अधिसूचना के तहत एमफिल दाखिले से वाइवा को हटाने की मांग रखी। क्योंकि नए नियमों के चलते प्रोफेसर अपने मनपसंद छात्र को पास कर देते हैं।
एकेडमिक काउंसिल के बाद एग्जीक्यूटिव काउंसिल में भी छात्रसंघ के विरोध प्रदर्शन व हंगामा करने के चलते विश्वविद्यालय प्रबंधन ने छात्रसंघ अध्यक्ष मोहित कुमार को नोटिस भेज दिया है। क्योंकि ऐड ब्लॉक पर किसी भी प्रकार के विरोध प्रदर्शन, सभा व भूख हड़ताल करने की विश्वविद्यालय प्रबंधन ने मनाही कर रखी है। विश्वविद्यालय ने अपने नोटिस में लिखा है कि जेएनयू नियमों को तोड़ने के लिए क्यों न आपके खिलाफ कार्रवाई की जाए।