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JNU में नई नीति से दाखिला प्रक्रिया पर 28 अप्रैल तक रोक

Thu, 27 Apr 2017 11:08 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
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JNU
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हाईकोर्ट ने जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय (जेएनयू) में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा जारी अधिसूचना के तहत दाखिला नीति पर रोक लगा दी। अदालत ने माना कि इस नीति से छात्रों पर व्यापक असर पड़ेगा और दायर याचिका पर सुनवाई जरूरी है।     
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कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल व न्यायमूर्ति अनु मल्होत्रा की खंडपीठ ने अपने अंतरिम फैसले में सिंगल जज के 16 मार्च को दिए फैसले पर अमल पर 28 अप्रैल तक के लिए रोक लगा दी। खंडपीठ ने जेएनयू छात्रों की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि यदि सिंगल जज के फैसले व टिप्पणियों के आधार पर दाखिले दिए जाते है तो उनका मानना है कि इसका व्यापक असर पड़ेगा। ऐसे में याची छात्रों का पक्ष सुनना जरूरी है।      

जेएनयू के कुछ छात्रों द्वारा दायर इस याचिका में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा दाखिला प्रक्रिया के संबंध में 5 जुलाई 2016 को जारी अधिसूचना को चुनौती दी गई है। अधिसूचना में तय किया गया है कि एक प्रोफेसर तीन से ज्यादा एमफिल और पीएचडी करने वाले आठ से अधिक छात्रों को गाइड नहीं कर सकता। छात्रों की याचिका को सिंगल जज ने पिछले माह खारिज कर दिया था।   
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उन्होंने अपने फैसले में कहा था कि यूजीसी की अधिसूचना के तहत तय नियमों का पालन जेएनयू सहित सभी विश्वविद्यालय को करना चाहिए। अदालत ने कहा यदि छात्रों की याचिका स्वीकार की गई तो कानून को पुन: लिखने के बराबर होगा। इतना ही नहीं अधिसूचना लागू होने के बाद याचिका स्वयं ही खत्म हो गई है।   
   
छात्रों ने यूजीसी की अधिसूचना को अपने भविष्य के लिए खतरा बताया है। उन्होंने तर्क रखा है कि अधिसूचना में निर्धारित धाराओं के कारण वे उचित मार्गदर्शन के लिए पर्यवेक्षक नहीं पा सकेंगे। इससे उनका भविष्य अंधकारमय हो जाएगा और वे शिक्षा से वंचित होंगे।      
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