सरकार के वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, जून या जुलाई में जब भी शिक्षण संस्थान खुलेंगे, सामाजिक दूरी को बनाए रखना बेहद मुश्किल है। क्योंकि देशभर में स्कूल बस से लेकर कक्षा में दो फीट या फिर एक मीटर की दूरी बनाए रखना संभव ही नहीं है। कैसे स्कूली छात्रों को एक साथ समूह में बैठने से रोका जाएगा।
इन्हीं विषयों पर बैठक में चर्चा हो रही है। क्योंकि भारत की एक बड़ी आबादी सरकारी स्कूलों में पढ़ती है, जहां पर 40 सीट वाली कक्षा में दोगुने छात्र पढ़ते हैं। महज एक शौचालय का उपयोग सैकड़ों छात्र करते हैं। बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता भी कम होती है, ऐसे में कैसे छात्रों को बचाया जाएगा?
बड़े स्कूलों को दो शिफ्टों में चलाने की योजना:
विशेषज्ञ अधिक संख्या वाले स्कूलों को दो शिफ्टों में चलाने की योजना बना रहे हैं। यहां पर आधे छात्रों को सुबह की शिफ्ट और अन्य को दूसरी शिफ्ट में कक्षा में बुलाया जाए। इसके लिए राज्य सरकारों से छात्रों और शिक्षकों की प्रति कक्षा आंकड़ा, इंफ्रास्ट्रक्चर आदि की रिपोर्ट मांगी गई है। हालांकि दिल्ली, मुंबई, बंगलुरू, चैन्नई, कोलकात्ता जैसे महानगरों में छात्रों की अत्यधिक संख्या के चलते पहले ही सरकारी स्कूल दो शिफ्टों में चलते हैं।
राज्य देंगे रिपोर्ट :
अधिकारी के मुताबिक, कोरोना से बचाव की वैक्सीन आने तक सामाजिक दूरी ही एकमात्र रास्ता है। हालांकि भारतीय जलवायु भी एक बड़ी बाधा है। मध्य मई के बाद देश के कई राज्यों में मानसून दस्तक देने वाला है। बारिश में महाराष्ट्र, गुजरात, दक्षिणी राज्य, असम, ओडिशा, बिहार, राजस्थान, मध्यप्रदेश समेत कई अन्य राज्यों में बाढ़ आती है। इन राज्यों में जुलाई तक बारिश से परेशानी होगी। इसके बाद कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में जुलाई और अगस्त का महीना अत्यधिक बारिश का होता है। यहां पर बादल फटते हैं। इन्हीं जलवायु परिवर्तनों के आधार पर राज्य अपने अकेडमिक कैलेंडर बनाते हैं। इसीलिए गाइडलाइन बनाने से पहले राज्यों के शिक्षा विभाग से पूछा गया है कि उनके एकेडमिक कैलेंडर में जलवायु का किस प्रकार ध्यान में रखा जाता है।
पाठ्यक्रम में कोविड-19 से बचाव पढ़ेें छात्र:
अधिकारी के मुताबिक, प्रारंभिक रिपोर्ट में सभी छात्रों को मेडिकल रिपोर्ट कार्ड बनाने पर भी बात हुई है। इसमें छात्र व अभिभावकों को साफ-सफाई व पौष्टिक आहार को मेन्यू में शामिल करवाना होगा। पेरेंट्स टीचर मीटिंग में उन्हें यह जानकारी दी जाएगी। इसके अलावा सीबीएसई अपने पाठ्यक्रम में कोविड-19 से बचाव को शामिल करने जा रहा है।