आईआईटी के छात्र अब बीटेक प्रोग्राम में अपनी पहली इंटर्नशिप ग्रामीण इलाकों में करेंगे, जोकि अनिवार्य होगी। ग्रामीण इलाकों में इंटर्नशिप के दौरान किए गए कार्यों का क्रेडिट स्कोर भी मिलेगा, जोकि अकेडमिक रिपोर्ट में जुड़ेगा।
खास बात यह है कि यह पायलट प्रोजेक्ट आईआईटी दिल्ली कैंपस से इसी सत्र शुरू होने जा रहा है। आईआईटी दिल्ली के डायरेक्टर प्रो.रामगोपाल राव के मुताबिक अभी तक इंटर्नशिप में छात्र कंपनियों में जाकर सीखते हैं, लेकिन अब छात्रों को तकनीक की पढ़ायी के साथ-साथ भारतीय परंपरा, संस्कृति और आम लोगों की दिक्कत से भी रूबरू करवाया जाएगा।
ग्रामीण इलाकों में बीटेक प्रोग्राम के छात्रों को इंटर्नशिप शुरू करवाने का मुख्य उदेश्य है कि वे ग्रामीणों की दिक्कतों को समझ सकें। क्योंकि देश की 70 फीसदी से अधिक आबादी गांवों में रहती है और वे अभावों में जीवन गुजार रहे हैं।
पचास छात्रों का ग्रुप दिल्ली समेत एनसीआर के चिह्ति गांवों में जाएगा। छात्र गांवों में जाकर किसानों की समस्याओं को समझेंगे और उनको हल करने की कोशिश करेंगे।
प्रोफेसर राव के मुताबिक, आईआईटी में आम लोगों की दिक्कतों को दूर करने पर आधारित रिसर्च को प्राथमिकता दी जा रही है। इसी के तहत गर्मियों की छुट्टियों में यह इंटर्नशिप शुरू की जाएगी।
छात्र वहां सरपंच से लेकर किसानों की आम दिनों की समस्याओं को समझेंगे, जिसमेंपेयजल, खेती, परिवहन, शौचालय, सड़क, नालियों, कूड़ा निस्तारण आदि शामिल होगा।
छात्र समस्या की जड़ तक पहुंचेंगे और लौटकर अपने प्रोफेसर की सहायता से उसका हल खोजेंगे। इस इंटर्नशिप में भाग लेने वाले छात्रों को क्रेडिट स्कोर भी मिलेगा।
प्रोजेक्ट सफल रहता है तो उस गांव के लोगों तक पहुंचाया जाएगा। इस योजना को बाद में केंद्र सरकार की उन्नत भारत अभियान योजना से भी जोड़ा जाएगा।
एम्स के डॉक्टरों के साथ भी होगी ट्रेनिंग
प्रो. राव के मुताबिक, किसानों की समस्याओं की तरह ही आईआईटी के छात्र डॉक्टरों को इलाज के दौरान आने वाली समस्याओं को समझकर उन्हें हल करने की भी कोशिश करेंगे। इसके लिए ये छात्र एम्स के डॉक्टरों के साथ काम करेंगे। इसके लिए जल्द ही आइआइटी दिल्ली और एम्स के बीच एक करार होने जा रहा है।