इंदिरा गांधी नेशनल ओपन यूनिवर्सिटी (इग्नू) ने रविवार को अपना 32वां स्थापना दिवस मनाया। इस मौके पर विश्वविद्यालय में ओपन एंड डिसटेंस लर्निंग: अवसर और जिम्मेदारी विषय पर एक चर्चा का आयोजन भी किया गया।
साथ ही इग्नू के अब तक के सफर को बताने के लिए एक प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में वाइस चांसलर प्रो. एस. बी. अरोड़ा, पूर्व वाइस चांसलर प्रो. रविंद्र कुमार और भारतीय शिक्षण मंडल के ऑल इंडिया आर्गेनाइजिंग सेक्रेटरी मुकुल कानितकर मौजूद रहे।
इस मौके पर मुकुल कानितकर ने कहा कि अगर हम ज्ञान के संदर्भ में बात करे तो पूर्व में हमारा समाज ज्यादा ज्ञानी था। उनके मुताबिक 1823 के शिक्षा से जुड़े शोधों की माने तो तब भारत 100 फीसदी शिक्षित था।
उन्होंने कहा कि भारत हमेशा से ही ओपन लर्निंग पक्षकार रहा था। उन्होंने कहा कि शिक्षा सिर्फ स्वयं पढने से आता है। पढ़ाने से शिक्षा नहीं मिलती खुद पढने से शिक्षा और ज्ञान दोनों मिलता है। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को भी हमेशा पढने की प्रक्रिया जारी रखनी चाहिए।
पूर्व चांसलर प्रो. रविंद्र कुमार ने कहा कि इग्नू ने बीते तीन दशकों खुद को एक प्रीमियम शिक्षण संस्थान के रूप में स्थापित किया है। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि हम अपने पाठ्यक्रमों में बदलाव करें।
उन्होंने कहा डिजिटल प्लेटफॉर्म की वकालत के साथ नौ बिंदुओं का अपने प्रस्ताव भी रखा जिसे ध्यान में रखकर मौजूदा पाठ्यक्रमों में बदलाव किया जाना चाहिए। जिससे हम 21वीं सदी में यहा से पढ़कर निकलने वाले छात्रों को नौकरी के लिए तैयार हो।
अंत में चांसलर एस. बी. अरोड़ा ने कहा कि इग्नू 13 क्षेत्रीय कार्यालय से अब 56 केंद्र खोल चुका है। आज इग्नू के कुल 2900 स्टडी सेंटर है। हम शिक्षा को आम लोगों के बीच तक ले जाना चाहते है। उन्होंने बताया कि मुझे खुशी है की आज इग्नू से पढ़ाई करने वालों में 44 फीसदी संख्या छात्राओं की है।