अरबों की लागत से बने गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय (जीबीयू) को मात्र बीए, बीकॉम व बीएससी की डिग्री देने वाला नहीं, बल्कि रिसर्च सेंटर के रूप में विकसित करेंगे। इसके लिए पर्याप्त फैकल्टी की भर्ती की जाएगी और रिसर्च के लिए सुविधाएं दी जाएंगी। विवि में ज्यादा से ज्यादा रिसर्च पर ध्यान दिया जाएगा ताकि रिसर्च के क्षेत्र में जीबीयू अपनी जगह बना सके।
यह बात शनिवार को जीबीयू के वाइस चांसलर और मेरठ मंडल के मंडलायुक्त प्रभात कुमार ने अमर उजाला से कही।वाइस चांसलर के मुताबिक, जीबीयू में बुद्धिज्म से जुड़े कई कोर्सेस को पसंद किया जाता है। इसमें विदेशों से आने वाले विद्यार्थियों की रुचि भी अधिक है। ऐसे में जीबीयू के लिए बुद्ज्मि महत्वपूर्ण विभाग है।
बुद्ज्मि से जुड़े मेडिटेशन के लिए शॉर्ट टर्म कोर्स शुरू कराएंगे। विशेषकर आईएएस, पीसीएस, आईपीएस-पीपीएस समेत अन्य अधिकारियों के लिए तीन दिन, पांच दिन, सात दिन के मेडिटेशन कोर्स कराए जाने पर विचार चल रहा है। इसके लिए कांफ्रेंस हॉल व गेस्ट हाउस समेत पर्याप्त साधन उपलब्ध हैं।
ताकि खुद का खर्च हो वहन
कुमार ने बताया कि विवि को इस तरह से तैयार किया जाएगा कि वह खुद अपना खर्च वहन कर सके। इसके अलावा इंजीनियरिंग व मैनेजमेंट आदि के विद्यार्थी कंपनियों में जाकर अपनी कंसल्टेंसी देंगे। इसके लिए कंपनियों से टाईअप किया जाएगा। कुमार के अनुसार, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के आठ मुख्य मार्गों के सर्वे में मिट्टी-परीक्षण व केमिकल कंपनियों में जल परीक्षण आदि किए जा सकते हैं। वाइस चांसलर के अनुसार, जीबीयू में उन कार्यों को प्रमुखता दी जाएगी, जो अन्य कॉलेज या विश्वविद्यालय नहीं कर रहे। ऐसे क्षेत्रों का विकास कर उन पर पकड़ बनाई जाएगी।