निजी स्कूलों में नर्सरी में दाखिले के इच्छुक आर्थिक पिछड़े वर्ग व वंचित वर्ग(ईडब्लयूएस) केअभिभावक असमंजस में हैं। दरअसल निजी भूमि पर बने 1400 स्कूलों में सामान्य वर्ग के लिए दाखिला प्रक्रिया तो शुरु हो गई है लेकिन अभी तक ईडब्लयूएस के लिए प्रक्रिया शुरु नहीं हो पाई है।
ईडब्लयूएस अभिभावकों के सामने बड़ा प्रश्न यह है कि आखिर उनके लिए प्रक्रिया कब शुरु होगी। वहीं उन्हें यह भी समझ नहीं आ रहा कि वह तब तक सामान्य वर्ग में दाखिले के लिए फॉर्म भर सकते हैं या नहीं।
ईडब्लयूएस श्रेणी के अभिभावकों को अब तक यह नहीं पता कि दाखिला प्रक्रिया सेंट्रलाइज्ड होगी या ऑनलाइन। दरअसल बीते साल सरकार ने इस वर्ग के दाखिले सेंट्रलाइज्ड ही किए थे। सरकार ने आवेदन प्रक्रिया के बाद लॉटरी निकाली थी। अभिभावकों का कहना है कि यह कैसे पता चलेगा कि ईडब्लयूएस की दाखिला प्रक्रिया शुरु हो रही है।
एडमिशन नर्सरी डॉट कॉम प्रमुख सुमित वोहरा ने बताया कि ईडब्लयूएस के ज्यादातर अभिभावक फोरम पर सवाल कर रहे हैं कि प्रक्रिया कब शुरु होगी। साथ ही उन्हें यह भी समझ नहीं आ रहा कि वह सामान्य श्रेणी केतहत आवेदन कर सकते हैं या नहीं।
उन्हें बताया जा रहा है कि यदि अभिभावक की आय एक लाख से अधिक है तो वह सामान्य श्रेणी केअंतर्गत आवेदन नहीं कर सकते हैं। अधिकारी बताते हैं कि अभिभावकों को घबराना नहीं चाहिए क्योंकि ईडब्लयूएस केलिए प्रक्रिया जल्द शुरु कर दी जाएगी।
बस रुट केआधार पर नेबरहुड(दूरी) के अंक
नर्सरी दाखिले में नेबरहुड(दूरी) एक अहम मानक बनता है। ऐसे में इस मानक को लेकर स्कूल मनमानी कर रहे हैं। कुछ स्कूलों ने बस रुट के हिसाब से दूरी तय की है और उसी के आधार पर अंक निर्धारित किए हैं। इस तरह से स्कूल 10 से 30 अंक तक दे रहे हैं।
वहीं एक स्कूल ने तो स्कूल बस की सुविधा लेने पर 20 अंक तक दिए जाने की बात कही है। अभिभावकों का कहना है कि यह बड़ा अजीब है कि यदि कोई बस सुविधा नहीं लेता तो उसे दूरी केअंक नहीं मिलेंगे।
आय प्रूफ लगाने पर ही फॉर्म हो रहा स्वीकार
कुछ स्कूलों की ओर से आय का प्रूफ मांगने की बात सामने आ रही थी। अब एक स्कूल में तो आय प्रूफ जोडने पर ऑनलाइन फॉर्म स्वीकार हो रहा है। एक अभिभावकक ने बताया कि उन्होंने ब्लूबेल्स इंटरनेशनल स्कूल ईस्ट ऑफ कैलाश में बेटी केदाखिले के लिए ऑनलाइन आवेदन किया। ऑनलाइन फॉर्म में आय की जानकारी मांगी गई। जानकारी भरने पर एक कॉलम आया जिसमें आय प्रूफ देने की बात कही गई। अभिभावक का कहना है कि यह गलत है और सरकार को इस पर रोक लगानी चाहिए।