पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम का सपना था कि डॉक्टर डिग्री के बाद एक साल तक ग्रामीण इलाकों में सेवाएं दें, लेकिन यह पूरा नहीं हुआ। लेकिन आईआईटियंस ने देश व समाज सेवा का नया उदाहरण पेश किया है।
आईआईटी से एमटेक व पीएचडी पास 1200 इंजीनियर 100 पिछड़े जिलों में तीन साल तक सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेजों में सेवाएं दे रहे हैं। उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर, उत्तर प्रदेश समेत 11 राज्यों में इसकी शुरुआत हो चुकी है।
मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावडे़कर ने बुधवार को बताया कि सौ जिलों के सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेजों में जहां शिक्षकों के पद खाली थे। वहां निविदा पर असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में नियुक्ति मिली है। हालांकि, उक्त शिक्षक चाहेंगे तो अपनी सेवाएं आगे भी जारी रख सकते हैं।
शिक्षकों को सत्तर हजार रुपये मासिक वेतन मिलेगा। तकनीकी उच्च शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए टेक्यूप-3 (टेंपरेरी ज्वाइंट प्रोजेक्ट इंस्टीट्यूट एनालिटिकल एनसाइट्स) में पैसे के साथ-साथ ट्रेंड शिक्षक भी मुहैया करवाए जा रहे हैं। उक्त शिक्षक तकनीकी शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के साथ इंटर्नशिप से लेकर प्लेसमेंट तक की तैयारी भी करवाएंगे।