दिल्ली विश्वविद्यालय के नामी सेंट स्टीफंस कॉलेज का डीयू से अलग होने का रास्ता लगभग साफ हो गया है। कॉलेज में हुई प्रबंध समिति (गवर्निंग बॉडी) की बैठक में कॉलेज को स्वायत्त बनाए जाने के प्रस्ताव को सैद्धांतिक मंजूूरी दे दी गई।
हालांकि प्रस्ताव पर चार सदस्यों ने असहमति भी जताई, इसके बावजूद इसे मंजूरी दे दी गई। कहा जा रहा है कि अब कॉलेज विश्वविद्यालय से बंधा नहीं होगा। दाखिला प्रक्रिया से लेकर फीस ढांचा सब कुछ तय करेगा।
गवर्निंग बॉडी की बैठक में शनिवार को कॉलेज को स्वायत्त किए जाने का प्रस्ताव लाया गया। बैठक शुरू होने के साथ ही शिक्षक और छात्र कॉलेज को स्वायत्त बनाए जाने का विरोध करने लगे। दिल्ली विश्वविद्यालय शिक्षक संघ पहले ही कह चुका है कि सेंट स्टीफंस को डीयू से अलग नहीं होने दिया जाएगा।
‘प्रस्ताव को मंजूरी शिक्षा व्यवस्था को तहस-नहस करने का प्रयास’
du
- फोटो : अमर उजाला
शिक्षकों का मानना है कि एक कॉलेज से स्वायत्तता प्रदान किए जाने की शुरुआत हुई है, अब अन्य कॉलेज भी स्वायत्तता मांगना शुरू करेंगे।
उल्लेखनीय है कि बीते कुछ महीनों से कुछ नामी कॉलेजों में स्वायत्तता लेने के लिए रेस तेज हुई है।
श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स, हंसराज कॉलेज व सिख गुरुद्वारा प्रबंध कमेटी से जुड़े कॉलेज भी स्वायत्तता चाहते हैं। हालांकि, इस फैसले को लेकर कॉलेज ने स्टाफ काउंसिल व शिक्षकों से बात नहीं की है। ऐसे में अगर विवाद बढ़ता है तो इसे शिक्षकों के समक्ष भी लाया जा सकता है।
दिल्ली विश्वविद्यालय शिक्षक संघ के संयुक्त सचिव डॉ. राजेश झा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के स्वायत्तता के प्रस्ताव को सेंट स्टीफंस कॉलेज की गवर्निंग बॉडी द्वारा स्वीकार किए जाने की कड़ी निंदा की है। उनका कहना है कि यह एक तरह से शिक्षा व्यवस्था को तहस-नहस करने का प्रयास है। स्वायत्त कॉलेज होने का मतलब है कि अब कॉलेज अपना पाठ्यक्रम, परीक्षा, नतीजे, भर्ती करने के लिए स्वतंत्र होगा।
शिक्षकों की सैलरी व छात्रों के फीस के ढांचे को भी तय करने का अधिकार कॉलेज को हो जाएगा। जबकि अभी इन सब विषय में फैसला लेने के लिए कॉलेजों को विश्वविद्यालय से मंजूरी लेनी होती है। अब कॉलेज को डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा लेने की योजना है।