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बोर्ड रिजल्ट से पहले डीयू में दाखिले के भय से परेशान है छात्र

Thu, 23 Mar 2017 02:49 PM IST
शाहनवाज आलम/अमर उजाला, गुरुग्राम
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- फोटो : अमर उजाला
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दिल्ली यूनिवर्सिटी (डीयू) में अधिक कटऑफ छात्रों के भय का सबब बना हुआ है। बोर्ड की परीक्षा खत्म होने से पहले ही आगे की पढ़ाई और हाईकट ऑफ के बारे में सोच-सोचकर छात्र परेशान हो रहे है और अधिक अंक लाने के लिए अधिक मेहनत करने में जुटे हैं।
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अधिक अंक लाने का दबाव का नतीजा है कि छात्रों के अंदर मनोवैज्ञानिक समस्याएं आने लगी है। नींद खत्म हो गई है। परीक्षा के समय में तनाव के कारण अभिभावक चिंतित है और उन्हें मनोवैज्ञानिक और काउंसलरों के पास लेकर पहुंच रहे हैं।

बोर्ड परीक्षा का काउंटडाउन शुरू होते ही छात्र दबाव में है। नागरिक अस्पताल से लेकर निजी अस्पतालों में ऐसे विद्यार्थी पहुंच रहे हैं। स्कूलों द्वारा भी छात्रों को परीक्षा का तनाव दूर करने के लिए स्पेशल काउंसलिंग दी जा रही है।
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जिला अस्तपाल के मनोवैज्ञानिक और काउंसलरों के पास अभिभावक बच्चों में नींद नहीं आने और पढ़ाई पर ध्यान नहीं देने की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं। डॉक्टरों की मानें तो 12वीं कक्षा के छात्रों में सबसे ज्यादा भय अधिक बोर्ड परीक्षा के बाद शुरू होने भविष्य की दौर के लिए है।

कोई आईआईटी में दाखिला को लेकर चिंतित है तो कोई मेडिकल कॉलेज के लिए। तो कुछ दिल्ली यूनिवर्सिटी (डीयू) के हाई कटऑफ के बारे में सोच कर अभी से परेशान हो रहे हैं। फोर्टिस अस्पताल के मानसिक स्वास्थ्य एवं व्यवाहरिक विज्ञान की विभागाध्यक्ष डॉ. कामना छिब्बर कहती है बीते एक सप्ताह में 40 से अधिक छात्र परीक्षा से संबंधित तनाव को लेकर आ रहे हैं।

छात्रों को 90 फीसदी से कम अंक आने का भय है। डीयू की कटऑफ की चिंता की वजह से कई छात्रों पढ़ाई में ध्यान केंद्रित नहीं कर पा रहे हैं। इसके लिए उन्हें योग, व्यायाम और भी कई चीजें बताई जा रही है।

मेदांता के वरिष्ठ मनोवैज्ञानिक डॉ. सौरभ मल्होत्रा ने बताया कि हर दिन परीक्षा को लेकर चार-पांच छात्र पहुंच रहे हैं। छात्रों में सबसे ज्यादा पढ़ाई और अंक को लेकर भय सता रहा है। स्कूलों में छात्रों को मोटिवेशनल फिल्म दिखाकर प्रोत्साहित किया जा रहा है। कम अंक आने पर दूसरे विकल्प के बारे में बताया जा रहा है।
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डॉक्टरों के टिप्स
-छात्रों पर अनावश्यक दबाव न बनाए
-किसी से तुलना न करें
-पढ़ाई के साथ खेलने कूदने की छूट दें
-छात्र को योग और हल्के व्यायाम के लिए प्रोत्साहित करें
-छात्रों को करियर के विकल्प के बारे में बताए
-अकेला न छोड़े
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