हरियाणा शिक्षा निदेशालय ने निजी स्कूलों के खिलाफ शिकंजा कसने की तैयारी शुरू कर दी है। हरियाणा शिक्षा नियमावली 134ए के तहत गरीबी रेखा के नीचे (बीपीएल) और आर्थिक रूप से कमजोर (ईडब्ल्यूएस) छात्रों के लिए आरक्षित सीटों की जानकारी नहीं देने वाले स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
निदेशालय ने प्रदेश के 2355 स्कूलों को नोटिस भेजा है। इसमें गुरुग्राम के 277 स्कूल शामिल है। स्कूलों को नोटिस जारी कर निदेशालय ने पूछा है कि क्यों ने उनकी मान्यता रद्द कर दी जाए। इस बाबत सेकेंडरी शिक्षा निदेशक ने जिला शिक्षा अधिकारी और जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी को पत्र भेजा है।
दरअसल, हरियाणा एवं पंजाब हाईकोर्ट ने हरियाणा शिक्षा नियमावली की धारा-134ए के तहत निजी स्कूलों को बीपीएल और ईडब्ल्यूएस बच्चों को दाखिला देने के आदेश दिए हैं। निजी स्कूलों को अपने यहां आरक्षित सीटों का ब्योरा देना था। इसके लिए विभाग ने इस बार ऑनलाइन एमआईएस पोर्टल के जरिये सूचनाएं मांगी थीं, लेकिन जिले के केवल 56 स्कूलों ने ही जानकारी दी।
माध्यमिक शिक्षा के निदेशक ने स्कूलों को नोटिस जारी करते हुए कहा है कि शिक्षा नियमावली 2013 की धारा-134ए के तहत 10 फीसदी सीटों पर दाखिला देना अनिवार्य है। कुछ स्कूलों ने इस बारे में गलत सूचनाएं दी है तो कई ने जानकारी ही नहीं दी है, जबकि इस बारे में लगातार स्कूलों को सूचित किया जाता रहा है। हाईकोर्ट द्वारा भी इस मामले कई बार आदेश दिए गए हैं, लेकिन स्कूलों का रुख साफ नहीं है।
बिना किसी आदेश के अभी तक जिला अधिकारी भी किसी तरह के कार्रवाई से बच रहे थे। केवल पत्र व्यवहार के जरिये स्कूलों से इस बाबत गुजारिश की जा रही थी। अब अगर कोई स्कूल गरीब वर्ग के बच्चों को एडमिशन देने में आनाकानी करता है तो उसकी लिस्ट तुरंत विभाग को भेजे जाने का आदेश दिया गया है, जिसके बाद अब सीधे एजुकेशन डायरेक्टर की तरफ से स्कूलों पर कार्रवाई की जाएगी।
नियम के तहत सभी स्कूलों को सीटों के बारे में जानकारी देनी है। स्कूलोें को पर्याप्त समय दिया गया था, लेकिन कई स्कूलों ने आरक्षित 10 फीसदी सीटों की जानकारी नहीं दी है। अगर स्कूलों के जवाब संतोषजनक नहीं होते है तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। मान्यता भी रद्द की जा सकती है। -एसएस फूलिया, निदेशक, माध्यमिक शिक्षा विभाग