राजधानी में निजी स्कूलों पर शिक्षा निदेशालय ने सख्य रवैया अपनाया है। शिक्षा निदेशालय ने सरकारी जमीन पर बने निजी स्कूलों से गरीब कोटे के तहत दूसरी कक्षा से ऊपर की कक्षा में हुए दाखिलों का ब्यौरा मांगा है। स्कूलों को इस ब्यौरे को देने के लिए दो दिन का समय दिया गया है।
निदेशालय ने इससे पहले भी स्कूलों से यह ब्यौरा मांगा था लेेकिन केवल 154 स्कूलों ने ही दाखिलों के संबंध में जानकारी दी। आश्चर्यजनक यह है कि इन सभी स्कूलों द्वारा दी गई जानकारी गलत पाई गई है। ऐसे में शिक्षा निदेशालय ने सख्त होते हुए निजी स्कूलों को आदेश जारी किया है कि वह निदेशालय की वेबसाइट पर उपलब्ध एक लिंक के माध्यम से यह जानकारी अपलोड करें।
शिक्षा निदेशालय के उपशिक्षा निदेशक एजुकेशन (पीएसबी) की ओर से जारी किए गए इस आदेश में कहा गया है कि स्कूलों को शैक्षणिक सत्र 2016-17 के अंतर्गत हुए दाखिलों का ब्यौरा देना है। स्कूलों ने ऑनलाइन डाटा अपलोड भी किया। लेकिन डाटा की छंटनी के बाद पाया गया कि 154 स्कूलों ने ही डाटा अपलोड किया है। गरीब कोटे के दाखिलों के संबंध में दिया गया यह डाटा भी अधूरा व गलत पाया गया।
इस अधूरे व गलत आंकड़े के कारण यह पता लगाना कठिन है कि सरकारी जमीन पर चल रहे निजी स्कूलों में दूसरी कक्षा से ऊपर की कक्षाओं में कितने दाखिले आर्थिक पिछड़े वर्ग के तहत किए गए। उल्लेखनीय है कि यह जानकारी निदेशालय को हाईकोर्ट में देनी है। ऐसे में निदेशालय ने स्कूलों को यह जानकारी अपलोड करने के लिए दो दिन का समय दिया है। जिससे कि यह जानकारी हाईकोर्ट में दी जा सके।