दिल्ली विश्वविद्यालय में छात्र चरखा चलाकर सूत कातने की कला सीखते नजर आएंगे। डीयू के गांधी भवन ने राजघाट स्थित गांधी स्मृति दर्शन समिति के साथ मिलकर चरखा कातने के तीन माह के कोर्स की शुरुआत की है।
इस सर्टिफिकेट कोर्स की खास बात यह है कि दोनों संस्थान की ओर से संयुक्त रूप से उन्हें सर्टिफिकेट दिया जाएगा। प्रयोग के तौर पर शुरू किए जा रहे इस कोर्स की सफलता के बाद इसे आगे बढ़ाया जाएगा। आगामी 11 अक्तूबर से इसकी शुरुआत होने जा रही है।
गांधी भवन की निदेशक प्रो. अनीता शर्मा ने बताया कि अब तक गांधी भवन में चरखा कातने का 24 घंटे का एक कोर्स चलाया जाता है। लेकिन पहली बार गांधी स्मृति दर्शन समिति के साथ मिलकर तीन माह के सर्टिफिकेट कोर्स की शुरुआत की जा रही है।
इस कोर्स की कक्षाएं दोनों संस्थानों में चलेंगी। गांधी भवन की वेबसाइट से फॉर्म डाउनलोड कर 10 अक्तूबर तक आवेदन किया जा सकता है। बुधवार व शुक्रवार को कक्षाएं दोपहर तीन से पांच बजे तक लगेंगी।
इस कोर्स में पूरी तरह से उन्हें चरखा चलाने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। कोई भी छात्र इसमें दाखिला ले सकता है। उन्होंने बताया कि 24 घंटे वाला चरखा कातने का कोर्स भी छात्रों के बीच खासा लोकप्रिय है।
6 अक्तूबर को चरखा कातने से संबंधित एक वर्कशाप भी आयोजित की जा रही है। जिसमें इसके फायदों के विषय में जानकारी दी जाएगी। इस कोर्स को शुरू करने के पीछे प्रशासन की सोच गांधीजी के विचारों को युवाओं के बीच पहुंचाना है। क्या इस कोर्स के लिए खादी के कपड़े पहन कर आना अनिवार्य है इस पर उन्होंने कहा कि ऐसा अनिवार्य नहीं है, कोर्स के लिए किसी भी तरह के कपड़े पहन सकते हैं।