दिल्ली विश्वविद्यालय में शिक्षक संघ (डूटा) के डीयू बंद के दूसरे दिन शिक्षक कक्षाएं छोड़कर सड़क पर उतरे। बुधवार को शिक्षकों ने कुलपति कार्यालय के बाहर धरना दिया। कुलपति को हटाने की मांग सहित अन्य मुद्दों को लेकर किए गए इस धरने-प्रदर्शन के लिए कुलपति कार्यालय के बाहर बड़ी संख्या में शिक्षक एकत्र हुए। शिक्षकों ने यूजीसी रेगुलेशन 2018 को संशोधन के साथ लागू करने की मांग की।
शिक्षक संघ के इस प्रदर्शन को डीयू कर्मचारियों का भी समर्थन मिला। शिक्षक संघ दो दिवसीय इस हड़ताल और प्रदर्शन को पूर्णत: सफल बता रहा है। डूटा ने 8 और 9 जनवरी को डीयू बंद और हड़ताल का आह्वान किया था, जहां मंगलवार को कई कॉलेजों में कक्षाएं नहीं लगी।
वहीं ऐसा ही हाल बुधवार को भी रहा। शिक्षकों के साथ ही विद्यार्थी भी कक्षाओं में नहीं पहुंचे। कॉलेजों के स्टॉफ रूम भी खाली रहे। जहां कुछ कॉलेजों में विद्यार्थी कक्षाओं में पहुंचे वहां शिक्षकों की ओर से विद्यार्थियों हड़ताल के कारणों के बारे में बताया गया।
एग्जीक्यूटिव काउंसिल सदस्य राजेश झा ने दो दिवसीय हड़ताल को पूरी तरह से सफल बताया। उन्होंने कहा कि डीयू में शिक्षक कुलपति के रवैये से परेशान है। शिक्षक सरकार की नीतियों से नाराज हैं। स्थायी नियुक्ति, पदोन्नति, पेंशन समेत कई मुद्दों का समाधान नहीं होने के कारण शिक्षकों में असंतोष है।
डूटा अध्यक्ष राजीव रे ने कहा कि प्रशासन को यूजीसी रेगुलेशन 2018 को संशोधन के साथ अपनाना चाहिए, जिससे कि शिक्षक लाभान्वित हो सकें। डूटा ने कुलपति को चेताया कि वह जल्द से जल्द एकेडमिक काउंसिल की बैठक बुलाएं और उसमें कमेटी की सिफारिशों को रखा जाए।