एकेटीयू की ओर से असिस्टेंट प्रोफेसरों के लिए एप्टीट्यूट टेस्ट का पेंच फंसता ही जा रहा है। पिछले दिनों हुए टेस्ट में करीब 90 फीसदी प्रोफेसर फेल हो गए तो यूनिवर्सिटी ने सभी असिस्टेंट प्रोफेसरों के लिए टेस्ट जरूरी कर दिया।
ऐस में अब सभी शिक्षक साल-2017 में होने वाले एप्टीट्यूट टेस्ट को लेकर परेशान हैं और एक बार फिर कोर्ट जाने की योजना बना रहे हैं। प्लेसमेंट के गिरते ग्राफ को देखते हुए यूनिवर्सिटी ने असिस्टेंट प्रोफेसरों का छात्र-छात्राओं को पढ़ाने की योग्यता जांचने के लिए एप्टीट्यूट टेस्ट लिया था।
हालांकि इस टेस्ट में प्रदेश के करीब तीन हजार शिक्षक ही बैठ पाए थे और उनमें भी 90 फीसदी असिस्टेंट प्रोफेसर फेल हो गए थे। ऐसे शिक्षकों को कॉलेजों ने भी बाहर का रास्ता दिखाना शुरू कर दिया है।
एप्टीट्यूट टेस्ट का रिजल्ट देखकर यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर भी दंग रह गए हैं और उन्होंने प्रदेशभर के असिस्टेंट प्रोफेसरों के लिए इस टेस्ट को जरूरी कर दिया। जो इस टेस्ट को पास कर पाएंगे वही कॉलेजों में शिक्षक रह पाएंगे।
यूनिवर्सिटी के इस निर्देश से प्रदेश के करीब 25 हजार असिस्टेंट प्रोफेसरों की नींद उड़ गई है। हालांकि असिस्टेंट प्रोफेसर कोर्ट जाने का मन बना रहे हैं।