केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने फीस को लेकर निजी स्कूलों से रिपोर्ट मांगी है। सीबीएसई ने कहा कि सभी निजी स्कूल हाल के साल में फीस बढ़ोतरी के आंकड़े बोर्ड को भेजे।
अभिभावकों ने निजी स्कूलों द्वारा परिसर से ही ड्रेस और किताबें खरीदने के लिए दबाव बनाए जाने की शिकायत की थी। इसके बाद बोर्ड ने निजी स्कूलों को निर्देश दिए थे कि वे स्कूल परिसर को दुकान न बनाएं। बता दें कि फीस में इजाफे के साथ ही निजी स्कूल छात्रोँ और उनके माता-पिता पर दबाव बना रहे थे कि वे स्कूल परिसर में ही लगे स्टॉल से यूनिफॉर्म और कॉपी-किताबें खरीदें। परिसर में किताबें बाजार मूल्य से ज्यादा कीमत पर बेची जा रही थीं।
इस मामले में केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने बताया कि हमने स्कूलों से कहा है कि वे मनमाने तरीके से फीस नहीं ले सकते। स्कूल के मदों की फीस तर्कसंगत होनी चाहिए। उनमें कोई ऐसे शुल्क नहीं होने चाहिए, जिनका जिक्र रसीद में ना किया गया हो। क्योंकि, इससे अभिभावकों को खासी दिक्कतें होती हैं।
जावड़ेकर ने कहा कि इन्ही चीजों को रोकने के लिए सीबीएसई ने सभी निजी स्कूलों से फीस ढांचे और इसमें बढ़ोतरी के आंकड़ा मांगा है। ज्यादातर स्कूलों ने आंकड़े भेज दिए हैं, अभी इनका आंकलन किया जा रहा है। जिन स्कूलों ने अभी तक फीस के आंकड़े नहीं भेजे हैं, उन्हें स्मरणपत्र जारी किया गया है, इसके बाद उनपर कार्रवाई होगी।
गौरतलब है कि फीस बढ़ोतरी को रोकने के लिए बीते महीने गुजरात सरकार ने विधानसभा में गुजरात स्व-वित्तपोषित स्कूल (रेगुलेशन ऑफ फीस) विधेयक-2017 पेश किया था। जिसका उद्देश्य बढ़े हुए फीस को विनियोजित करना था। इस विधेयक के तहत सरकार हर जोन में तीन फीस रेगुलेटरी कमेटी बनाने वाली है, जो स्कूलों में मनमाने तरीके से फीस बढ़ोतरी पर निगरानी करेगा।