दिव्यांग होना मुकाम हासिल करने में बाधक नहीं बन सकता। इस बात को उत्तर प्रदेश के गाजीपुर निवासी डॉ. अखिलेश कुमार ने सही साबित कर दिया है। जन्म के छह माह बाद ही दृष्टिहीन हो जाने के बावजूद उन्होंने लगन और हिम्मत नहीं हारी।
इसका परिणाम उन्हें शनिवार को डीयू के 93वें दीक्षांत समारोह में मिला, जहां अखिलेश को पीएचडी की डिग्री से नवाजा गया। अपनी हिम्मत के बल पर ही वे डीयू के गुरु तेग बहादुर खालसा कॉलेज में पढ़ा रहे हैं।
अखिलेश कहते हैं कि हम जैसे छात्रों के लिए सामान्य छात्रों के मुकाबले पढ़ाई करना मुश्किल होता है। लेकिन इस मुश्किल को कभी भी अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया। उन्होंने नामवर सिंह की पुस्तक दूसरी परंपरा की खोज पर रिसर्च किया और उसका अंग्रेजी में अनुवाद किया है।
अखिलेश ने बताया कि देवनागरी और अंग्रेजी भाषा में किताबें हैं, लेकिन ब्रेल लिपि की किताबों को लेकर छात्रों को परेशानी उठानी पड़ती है। सुनने के सॉफ्टवेयर हैं, लेकिन किताब से ही पढ़ने का आनंद आता है। वे कहते हैं कि डीयू में उन्हें हमेशा लोगों से सहयोगपूर्ण रवैया मिला, लेकिन कभी-कभी छात्र मन दुखा देते हैं, मगर हम माफ कर देते हैं।