राजधानी वायु की गुणवत्ता खराब होने के कारण गैस चैंबर बनी हुई है। सुधार के प्रयासों के बावजूद स्थिति जस की तस है। खराब आबोहवा की गंभीर स्थिति के मद्देनजर शिक्षा निदेशालय ने स्कूलों के लिए एक्शन प्लान तैयार किया है। निदेशालय का उद्देश्य स्कूली बच्चों को प्रदूषित हवा में सांस लेने के बुरे प्रभाव के संबंध में जागरूक करना है।
एक्शन प्लान के अनुसार, अब स्कूलों के उत्सव में किसी तरह के पटाखे छुड़ाने पर पाबंदी होगी। वहीं, स्कूल के प्रत्येक विद्यार्थी को एक पौधा लगाना होगा। निदेशालय ने स्कूलों के लिए दिशा निर्देश जारी किए हैं। स्कूलों को कहा गया है कि राज्य स्तरीय व जोनल स्तर की प्रतियोगिताएं आयोजित कराई जाएं।
इन प्रतियोगिताओं का विषय प्रदूषण रहित वातावरण होना चाहिए। जागरुकता के लिए प्रार्थना सभा में एक स्पेशल लेक्चर भी होना चाहिए। सभी विज्ञान प्रदर्शनियों व मेले की थीम भी वातावरण से जुड़ी होनी चाहिए। साथ ही दशहरा व दीवाली के दौरान खासतौर पर विशेष जागरूकता सत्र चलाए जाने के लिए कहा गया है।
वाद विवाद, चित्र प्रतियोगिताओं का विषय भी वातावरण से संबंधित होनी चाहिए। स्कूल व आसपास हरित अभियान चलाने, स्कूलों के इको क्लब को ऐक्टिवेट करने, वायु प्रदूषण के कारण होने वाले नुकसानों के लिए बोर्ड लगाए जाने आदि के लिए कहा गया है।