निजी स्कूलों में नर्सरी दाखिले की जारी रेस में कई स्कूलों में आवेदन करने के बाद अब अभिभावक दाखिले के लिए अंकों का गणित बैठा रहे हैं। दाखिले के लिए स्कूलों के मानक देखकर ही वह औसतन 10 से अधिक स्कूलों में आवेदन कर रहे हैं।
बीते वर्षों में देखने में आया है कि 75 से ऊपर अंक वालों के ही दाखिले की गुंजाइश रहती है। अब चूंकि स्कूलों में नेबरहुड (पड़ोस), भाई-बहन व पूर्व छात्र जैसे मानक एक समान हैं, लिहाजा इन मानकों के अंकों के कारण लॉटरी की स्थिति बन जाएगी।
नर्सरी दाखिले की रेस में कुछ मानकों के कारण एक-एक सीट पर दावेदारों की संख्या बढ़ जाएगी। दरअसल अभिभावकों का जोर कुछ नामी स्कूलों में आवेदन करने पर ही रहता है। वहां पड़ोस, सिबलिंग व एल्युमिनी के अंक महत्वपूर्ण बनते हैं।
मसलन, यदि ज्यादा संख्या में अभिभावक को दूरी के अधिकतम अंक मिले और एल्युमिनी के अंक भी मिल गए तो ऐसे अभिभावकों की संख्या बढ़ जाएगी। इससे एक सीट पर अधिक दावेदार होंगे जिससे एक सीट देने के लिए स्कूल को लॉटरी ही करनी पड़ेगी।
यह कर रहे अभिभावक
शालीमार बाग रहने वाली त्रिशा गुलाटी ने बताया कि उन्होंने स्कूलों के मानक व उनके अंक देखकर लगभग 10 स्कूलों में आवेदन किया है। अब उनकी योजना अन्य स्कूलों में आवेदन करने की भी है।
ऐसा इसलिए कि उन्हें स्कूलों में पड़ोस मानक के अंक तो मिल रहे हैं लेकिन पहला बच्चा होने के कारण भाई-बहन या पूर्व छात्र वाले मानकों के अंक नहीं मिल रहे हैं। औसतन उनके अंक 50 से 70 के बीच ही बन रहे हैं। अब ऐसी स्थिति में उनका नंबर लॉटरी में नाम आने पर ही आएगा।
ऐसे समझें इसे
इसको ऐसे भी समझ सकते हैं कि किसी स्कूल में 100 सीट हैं और नेबरहुड के 40-50 अंकों के साथ ही 90 तक आवेदक आ गए तो स्कूल को लॉटरी करनी ही पड़ेगी। खासकर बड़े नामी स्कूलों में तो लॉटरी होना लगभग तय है। ऐसा इसलिए होगा क्योंकि तय सीटों पर एक समान अंक पाने वाले अभिभावकों की संख्या ज्यादा होगी। यह स्कूल इन्हीं मानकों को अपने 100 अंकों के फॉर्मूले में रखते हैं। इसी तरह यदि एल्युमिनी के अंक भी आए तो इसके लिए भी लॉटरी करनी होगी।