उम्र का पड़ाव कोई भी हो पढ़ाई की कोई उम्र नहीं होती। कुछ ऐसा ही साबित करने में लगे हैं एलआईसी ऑफ इंडिया से पीआरओ के पद से सेवानिवृत्त हो चुके नागेश चड्ढा। 66 साल के नागेश दिल्ली विश्वविद्यालय में जर्मन भाषा में दाखिला लेना चाहते हैं। दाखिले के संबंध में जानकारी लेने वह ओपन डेज में पहुंचे।
उत्तरी दिल्ली स्थित रूप नगर निवासी नागेश कहते हैं कि पहली पारी से ज्यादा अच्छी दूसरी पारी होती है। दो बेटों के पिता नागेश उम्र के इस पड़ाव पर थक-हार कर बैठने की बजाए पढ़ाई जारी रखना चाहते हैं।
वह डीयू से ही बीकॉम में स्नातक हैं और विदेश से इंजीनियरिंग में डिप्लोमा कर चुके हैं। बीते साल ही उन्होंने डीयू से उर्दू भाषा में डिप्लोमा हासिल किया है। चूंकि उनकी पुत्रवधू जर्मन भाषा में पारंगत हैं लिहाजा अब वह चाहते हैं कि वे भी इसमें पारगंत हो।