जब सरकारी स्कूलों में शिक्षकों का ही टोटा है, तो सरकार की शिक्षा योजनाओं को तो पलीता लगना ही है। इसका असर शिक्षा की गुणवत्ता पर भी पड़ रहा है। मानव आवाज संस्था के संयोजक अभय जैन ने बताया कि आरटीआई से मिली जानकारी के मुताबिक, गुरुग्राम के प्राथमिक स्कूलों में अध्यापकों की 42 फीसदी कमी है। यहां के 135 प्राथमिक स्कूलों में अध्यापकों के 1085 पद स्वीकृत हैं। इनमें से 670 पदों पर ही अध्यापक नियुक्त हैं इस कारण 415 पद खाली पड़े हैं।
विभाग ने 51 अतिथि अध्यापकों को भर्ती किया हुआ है। जैन ने बताया कि बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान चलाने वाली सरकार की हकीकत यह है कि अनेक कन्या स्कूलों में अध्यापकों की संख्या नहीं के बराबर है।
गांव मोलाहेड़ा के कन्या प्राथमिक स्कूल में अध्यापकों के 17 में से 14 पद खाली हैं। गांव नाथूपुर के कन्या प्राथमिक स्कूल में अध्यापकों के 13 में से 12 पद खाली हैं। गुरुग्राम गांव के कन्या प्राथमिक स्कूल में 14 की बजाय महज सात अध्यापक हैं।
गांव झाड़सा के कन्या प्राथमिक स्कूल में पांच की बजाय दो अध्यापक हैं। सरहोल गांव स्थित प्राथमिक कन्या विद्यालय में 20 में से 19 पद खाली हैं। लड़कों के अधिकतर प्राइमरी स्कूलों में भी अध्यापकों की संख्या कम है।
बंधवाड़ी गांव स्थित प्राथमिक स्कूल में अध्यापकों के 7 में से 5 पद खाली हैं। गांव चकरपुर स्थित प्राथमिक स्कूल में अध्यापकों के 25 में से 22 पद खाली हैं। गांव डूंडाहेड़ा के प्राथमिक स्कूल में अध्यापकों के 36 में से 28 पद खाली हैं।
गांव घाटा के प्राथमिक स्कूल में भी अध्यापकों के आठ में से छह पद खाली हैं। सेक्टर-43 स्थित राजकीय मॉडल संस्कृति स्कूल में अध्यापकों के 12 में से 10 पद खाली हैं। इंदिरा कॉलोनी प्राथमिक स्कूल में अध्यापकों के आठ में से सात पद खाली हैं।