वैज्ञानिक ये मानते हैं कि ऊंट का दूध औषधीय गुणों से भरपूर होता है। ये शुगर के मरीजों के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है। आम तौर पर ऊंट का दूध जल्दी खराब हो जाता है। उबालने से इसकी पोषकता घट जाती है। यहीं से केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय के सोनीपत कुंडली में स्थापित राष्ट्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी उद्यमिता और प्रबंधन संस्थान (निफ्टम) के वैज्ञानिकों की रिसर्च टीम को एक अनोखा विचार आया कि आखिर कैसे इसे लंबे समय तक सुरक्षित रखने के साथ स्वादिष्ट रूप दिया जाए।
बीकानेर से ऊंट का दूध मंगाया। फिर उंटनी के दूध को हाई प्रेशर नॉन थर्मल प्रोसेसिंग (उच्च दबाव पर बिना गर्म किए) करने से इससे माइक्रोब्स (सूक्ष्मजीव) नष्ट हो गए और दूध की उम्र बढ़ गई। फिर दूध को पाउडर में बदलकर खास कम्प्रेशन (दबाव) तकनीक से बिस्कुट जैसे गोल आकार में तैयार किया गया। यह दो स्वादों, इलायची और वनीला में उपलब्ध है। इसके 20 ग्राम के बिस्कुट में करीब 20 फीसदी प्रोटीन, 19.3 फीसदी फैट और करीब 48 फीसदी कार्बोहाइड्रेट है। एसोसिएट प्रोफेसर अंकुर ओझा ने बताया कि करीब 100 ग्राम बिस्कुट 1 यूनिट इंसुलिन के बराबर है।
कम कैलोरी, अधिक फाइबर वाला हनी पाउडर
निफ्टम के निदेशक डॉ. हरिंदर ओबरॉय ने बताया कि संस्थान ऐसे अनेक शोध किए हैं। खाद्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. रजनी चोपड़ा ने शहद को बिल्कुल नए और टिकाऊ रूप में हनी पाउडर के रूप में विकास किया है। यह बिना कृत्रिम रसायन प्रक्रिया के तैयार किया गया है। शहद के पारंपरिक स्वाद, सुगंध और औषधीय गुणों को बरकरार रखा है। स्वास्थ्य के लिए यह उत्पाद लाभदायक है। इसमें कैलोरी कम और फाइबर की मात्रा अधिक है, जिससे ये जल्दी पचेगा। हनी पाउडर को हर्बल चाय, बेकरी उत्पाद, हेल्थ सप्लीमेंट्स, पेय और बाकी खाद्य उत्पादों में मिला सकते हैं।
बिना कैफीन की खजूर बीज कॉफी
अब बिना कैफीन की कॉफी का स्वाद, उसकी खुशबू का अनुभव जल्द मिलेगा। संस्थान ने खजूर के बीज से बनी कैफीन रहित कॉफी विकसित की है। भुने हुए खजूर के बीजों से इसे तैयार किया है। इसकी महक और स्वाद पारंपरिक कॉफी जैसा ही है। इसमें कैफीन बिल्कुल नहीं है। इसलिए यह स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित और लाभकारी विकल्प बन सकता है।
ओडीओपी से मिलेट्स के अनगिनत स्वाद
वर्ल्ड फूड इंडिया मेले में दिखा कि एक जिला-एक उत्पाद (ओडीओपी) के तहत देशभर में मिलेट्स से अनगिनत खाने के सामान बनाए जा रहे हैं। ये रंग, रूप और स्वाद में भी बिल्कुल अलग हैं। इनसे स्वास्थ्य से होने वाला लाभ ही इन्हें लोगों के बीच लोकप्रिय बनाएगा। रविवार को ये मेला खत्म हो गया। लेकिन नवंबर में होने वाले ट्रेड फेयर में इन्हें दिल्लीवासी खरीद पाएंगे। दिल्ली में लगे चार दिवसीय मेले में खाद्य तैयार करने की नई तकनीक आधारित मशीनें, खाद्य उत्पाद, व्यवसाय के लिए कंपनियों के बीच अनुबंध हुए।