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ये है दिल्ली में सरकार बनाने का गणित

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भाजपा अब दिल्ली में सरकार बनाने के रास्ते ढूंढ़ रही है। पार्टी के विधायक अन्य दलों के एमएलए के संपर्क में हैं। भाजपा के प्रदेश प्रभारी प्रभात झा ने कहा है कि सरकार बनाने का विकल्प खुला है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि अंतिम निर्णय राष्ट्रीय नेतृत्व का होगा।
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मंगलवार को राजधानी में चर्चा रही कि ‘आप’ के विधायक टूट रहे हैं। इस बीच प्रभात झा व ‘आप’ के विधायकों के साथ बैठक की भी चर्चा रही। शाम तक यह चर्चा ठंडी पड़ गई। इसके बाद प्रभात झा ने मीडिया को बताया कि फिलहाल वो इस तरह की कोई कवायद नहीं कर रहे हैं लेकिन कोई विधायक उनके पास आता है तो वे इनकार नहीं करेंगे।

उन्होंने कोई बैठक नहीं की है लेकिन भाजपा विधायक अन्य पार्टियों के एमएलए के संपर्क में हैं। सरकार बनाने का विकल्प खुला है। जब उनसे पूछा गया कि प्रदेश अध्यक्ष व केंद्रीय मंत्री डॉ. हर्षवर्धन कहते रहे हैं कि पार्टी जोड़तोड़ कर सरकार नहीं बनाएगी तो प्रभात झा ने कहा कि अब परिस्थितियां बदल गई हैं। पहले डॉ. हर्षवर्धन केंद्र की राजनीति में नहीं थे।
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भाजपा ने खोले सभी विकल्प

भाजपा के अंदर इन दिनों दिल्ली में सरकार बनाने को लेकर कवायद तेज हो गई है। इसी कवायद में पहला कदम माना जा रहा है कि भाजपा विधायक दल का नेता चुनने वाली है। भाजपा में विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद उपराज्यपाल के पास सरकार बनाने का दावा पेश किया जाएगा।

ऐसे में उपराज्यपाल संबंधित नेता को मुख्यमंत्री की शपथ दिला देंगे और सदन में बहुमत सिद्ध करने का 7-10 दिन का समय देंगे। सदन में ‘आप’ या कांग्रेस के जो विधायक साथ देने को तैयार होंगे वह या तो पक्ष में वोट करेंगे या फिर अनुपस्थित हो जाएंगे।

वहीं दिल्ली विधानसभा के पूर्व सचिव एसके शर्मा कहते हैं कि पार्टी का आदेश नहीं मानने पर सदस्यता खत्म करने की प्रक्रिया बहुत लंबी है। इस बीच सत्ताधारी पार्टी अपना अध्यक्ष बदलकर प्रक्रिया को और लंबा बना सकती है। जल्द चुनाव कराकर सत्ताधारी पार्टी की सीटें भी बढ़ाई जा सकती हैं।
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