नियंत्रक महालेखा परीक्षक (सीएजी) और दिल्ली सरकार ने आरोप लगाया कि तीनों डिस्कॉम्स अदालत के आदेश के बावजूद खातों के ऑडिट में सहयोग नहीं कर रहीं हैं। उन्होंने हाईकोर्ट को बताया कि अदालत के आदेश का सरासर उल्लंघन किया जा रहा है।
कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश बीडी अहमद और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल की खंडपीठ के समक्ष पेश कैग के अधिवक्ता ने कहा कि तीनों कंपनियां मांगे गए दस्तावेज उपलब्ध करवाने में आनाकानी कर रही हैं।
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उन्होंने कहा कि खंडपीठ ने सिंगल जज के फैसले के खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई के दौरान कंपनियों को ऑडिट में सहयोग का निर्देश दिया था।
दूसरी तरफ डिस्कॉम्स के अधिवक्ता ने सुनवाई स्थगित करने का आग्रह करते हुए कहा कि इसी मुद्दे पर उनकी याचिका सर्वोच्च न्यायालय में लंबित है, जिस पर मंगलवार को सुनवाई तय है।
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दिल्ली सरकार के अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने उनके तर्क पर आपत्ति जताते हुए कहा कि पहले तो यह अपील विचार योग्य ही नहीं है। उन्होंने कहा कि जब कंपनियां सिंगल जज के फैसले का उल्लंघन कर रही है तो उनकी अपील पर सुनवाई नहीं की जानी चाहिए।
वहीं, कैग के अधिवक्ता अमन लेखी ने भी उनके तर्क पर सहमति जताते हुए कहा कि बीएसईएस राजधानी पावर लिमिटेड, बीएसईएस यमुना पावर लिमिटेड कंपनी व टाटा पावर लिमिटेड जांच में सहयोग नहीं कर रही।
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उन्होंने कहा कि इस मामले की सुनवाई भी कंपनियों के खातों की सीबीआई जांच करवाने के संबंध में दायर याचिका के साथ की जाए। अदालत ने फिलहाल सुनवाई 24 मार्च तक स्थगित कर दी।