खरीदारों की असली लड़ाई तब शुरू हुई जब आईडीबीआई बैंक ने नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्युनल(एनसीएलटी) में जेआईएल के दिवालियेपन के लिए कार्रवाई शुरू की। यह खबर मिलते ही खरीदार घबरा गए और उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। जेआईएल से धोखा खाने वालों में चित्रा शर्मा पहली खरीदार थीं जिन्होंने याचिका दायर की थी।
इसके बाद एनसीएलटी ने मामले में दिवाला समाधान पेशेवर (आईआरपी) का गठन किया। आईआरपी के आने के बाद खरीदारों में उम्मीद जगी कि उनके साथ न्याय होगा, लेकिन उन्हें कुछ नहीं मिला। लंबे समय से चल रही इस कानूनी लड़ाई के बाद अब खरीदारों का कहना है कि उनकी समस्या पर किसी का ध्यान नहीं है। बैंक भी अपने पैसे की वसूली कर रहे हैं, इसलिए अब वे दोबारा सड़क पर उतर कर सरकार के सामने अपनी परेशानी रखेंगे और इसका समाधान निकालने की मांग करेंगे।