एशिया के सबसे प्रमुख बाजारों में एक सदर बाजार में मूलभूत सुविधाओं की कमी है। ऐसे में यहां के हजारों कारोबारियों का कारोबार प्रभावित हो रहा है। रेहड़ी पटरी वालों के अतिक्रमण के साथ ही भीषण जाम, गंदगी, पशुओं की अधिकता, लटकते तारों का मकड़जाल, जगह-जगह मलबा और खराब यातायात व्यवस्था से बाजार की व्यवस्था बिगड़ गई है।
कारोबारियों का कहना है कि यहां पर देशभर के साथ विदेश से भी लोग आते हैं, लेकिन व्यवस्था इतनी खराब है कि अब बाजार की छवि खराब होने लगी है। बृहस्पतिवार को अमर उजाला की ओर से सदर बाजार में संवाद कार्यक्रम रखा गया। इसमें कारोबारियों ने बाजार की प्रमुख समस्याओं से अवगत काराया। उनका कहना था कि आने वाले दिनों में विधानसभा चुनाव में जिसकी भी सरकार बने, यहां पर समस्याओं के निराकरण के लिए ठोस योजना बनाए और तुरंत उस योजना पर काम शुरू हो।
बाजार में 40 हजार से अधिक प्रतिष्ठान
सदर बाजार में 40 हजार से अधिक प्रतिष्ठान हैं। यहां पर पूरे देश के थोक खरीदारों के साथ ही दिल्ली-एनसीआर के लोग खरीदारी के लिए आते हैं। सामान्य दिनों में यहां पर रोजाना लाखों लोग खरीदारी करने आते हैं। यह बाजार मुगलकालीन है।
स्थिति यह हो गई है कि कारोबारियों के बच्चे अब यहां काम नहीं करना चाहते। वह नौकरी करना पसंद कर रहे हैं। चुनाव बाद जिसकी की भी सरकार बने, यहां की समस्याओं से निजात दिलाए।
-राकेश यादव, अध्यक्ष, फेस्टा
बाजार में समस्याएं इतनी हैं कि उसे बताया नहीं जा सकता। इससे ग्राहक तो परेशान होते ही हैं, साथ में यहां के कारोबारियों की हालत भी अब दिन-ब-दिन और खराब होती जा रही है।
-राजेंद्र शर्मा, महासचिव, फेस्टा
अतिक्रमण इतना है कि पैदल चलने की जगह नहीं बचती। अधिक भीड़ में असामाजिक तत्व भी सक्रिय हो जाते हैं। पुलिस सुरक्षा के नाम पर खानापूर्ति होती है। हर तरफ गंदगी ही देखने को मिलती है।
-दीपक मित्तल, कोषाध्यक्ष, फेस्टा
रेहड़ी पटरी वालों के अतिक्रमण के साथ ही यहां जाम, गंदगी, पशुओं का जमावड़ा और लटकते तारों का मकड़जाल है। इसके अलावा जगह-जगह मलबा और खराब यातायात व्यवस्था से बाजार की व्यवस्था बिगड़ी हुई है।
-परमजीत सिंह पम्मा, चेयरमैन, सदर बाजार ट्रेडर्स एसोसिएशन (फेस्टा)