नए कृषि कानून के विरोध में दिल्ली की सीमाओं पर किसानों का प्रदर्शन 27 दिन से जारी है। किसान आंदोलन के चलते दिल्ली समेत हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में अभी तक करीब 14 हजार करोड़ रुपये के व्यापार का नुकसान हुआ है।
कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने अमर उजाला को बताया कि किसान आंदोलन के चलते आज सभी व्यापार पूरी तरह से बर्बाद हो रहे हैं। इससे अब तक करीब 14 हजार करोड़ रुपये का व्यापार का घाटा हो चुका है। आंदोलन के कारण लगभग रोज 20 फीसदी ट्रक देश के अन्य राज्यों से सामान दिल्ली नहीं ला पा रहे हैं।
वहीं, दिल्ली से भी अन्य राज्यों में सामान भेजने में बहुत सी दिक्क्तों का सामना करना पड़ रहा है। दिल्ली न तो कोई औद्योगिक राज्य है और न ही कृषि राज्य बल्कि देश का सबसे बड़ा वितरण केंद्र है जहां अनेक राज्यों से सामान आता है। वहीं देशभर के अन्य राज्यों में दिल्ली से भेजा जाता है। दिल्ली में प्रतिदिन लगभग 50 हजार ट्रक देशभर के विभिन्न राज्यों से सामान लेकर दिल्ली आते हैं और लगभग 30 हजार ट्रक प्रति दिन दिल्ली से बाहर अन्य राज्यों के लिए सामान लेकर जाते हैं।
खंडेलवाल ने बताया, आंदोलन के कारण मुख्य रूप से अन्य राज्यों से एफएमसीजी प्रोडक्ट्स, लोगों द्वारा रोजमर्रा के उपयोग का सामान, खाद्य सामान, फल एवं सब्ज़ी, किराने का सामान, ड्राई फ्रूट, इलेक्ट्रॉनिक्स, बिजली का सामान, दवाइयां, भवन निर्माण का सामान, लोहा-स्टील, कपड़ा, मशीनरी, बिल्डिंग हार्डवेयर, लकड़ी एवं प्लाइवुड, रेडीमेड वस्त्र आदि का व्यापार प्रभावित हो रहा है।
यह सारा सामान दिल्ली-जयपुर, दिल्ली-मथुरा, आगरा एक्सप्रेस वे, दिल्ली-गाज़ियाबाद राजमार्ग, दिल्ली-चंडीगढ़ राजमार्ग आदि रास्तों से मुख्य रूप से आते हैं क्योंकि यही राजमार्ग दिल्ली को देश के सभी राज्यों से जोड़ते हैं और इन राजमार्गों पर आंदोलन के कारण या तो रास्ते बंद हैं या लम्बे जाम लगे होने के कारण ट्रकों को काफी लम्बा घूम कर दिल्ली आना पड़ रहा है जिसके कारण सप्लाई प्रभावित हो रही हैं।
आंदोलन के चलते अगर ऐसा लंबे समय तक चलता रहा तो सप्लाई में परेशानी हो सकती है। दिल्ली में आवश्यक वस्तुओं सहित अन्य वस्तुओं की कोई किल्लत नहीं हो, इसे ध्यान में रखते हुए कैट और ऑल इंडिया ट्रांसपोर्ट वेलफेयर एसोसिएशन पूरी कोशिश कर रहे हैं कि दिल्ली और अन्य राज्यों में जरूरत के सामानों की कोई किल्लत नहीं हो पाये।