शराब की बिक्री तथा उपभोग मौलिक अधिकार नहीं है और सरकार के पास इसकी कीमत तय करने का अधिकार है। यह दलील दिल्ली सरकार की ओर से उन याचिकाओं के जवाब में दी गई जिनमें शराब की बिक्री पर 70 फीसदी कोरोना फीस लगाने को चुनौती दी गई है। दिल्ली सरकार ने चार मई को शराब की कीमत पर 70 फीसदी कोरोना सैस लगाया था। इन याचिकाओं पर शुक्रवार को सुनवाई होगी।
हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार के वकीलों ने कहा कि राज्य शराब की बिक्री पर विशेष फीस लगा सकता है। सरकार ने अपने अधिकार का प्रयोग करते हुए शराब का विशेष मूल्य तय किया था। यह विशेष कीमत मूल कीमत तथा नियंत्रण व निगरानी लागत का मिश्रण है।
दिल्ली सरकार ने कहा कि चार से 25 मई के बीच शराब बिक्री से 227.44 करोड़ रुपये मिले जिसमें विशेष कोरोना फीस के 127 करोड़ रुपये भी शामिल थे। वहीं पिछले साल मई में यह आय 425.24 करोड़ रुपये थी। हालांकि पिछले साल अवधि में 800 दुकानें खुली हुई थी जबकि इस साल केवल 40 फीसदी दुकाने की खुलीं।
सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं में कहा गया कि सरकार मनमाने तरीके से शराब की कीमत पर विशेष कोरोना फीस लगा रही है। यह फैसला शराब की दुकानों पर लगी अपार भीड़ को देखते हुए सरकार ने बाद में लिया था क्योंकि वहां लोग सामाजिक दूरी का पालन नहीं कर रहे थे।