शहर का बस डिपो इन दिनों युवाओं के घूमने-फिरने और गपशप करने का अड्डा बन गया है। क्लास बंक कर कई छात्र डिपो में अपने दोस्तों के साथ यहां टाइम पास करते देखे जा सकते हैं।
डिपो के विश्रामालय में युगल जोड़े एक-दूसरे के साथ वक्त बिताने के लिए काफी देर तक यहां बैठते हैं। हालत यह है कि इनके कारण वहां बस का इंतजार कर रहे आम यात्रियों को बेंच और कुर्सियां तक नसीब नहीं होतीं, जिससे उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
छात्र-छात्राओं से बस अड्डे पर बैठने का कारण पूछने पर कोई बस का इंतजार करने का बहाना बनाता है तो कोई थकान मिटाने की बात कहता है।
बिना पैसों के होता है टाइम पास
सुबह के वक्त कुछ घंटे बिताने के बाद दोपहर चढ़ते ही ये छात्र-छात्राएं दैनिक यात्रियों की भीड़ में खो जाते हैं। अभी कॉलेजों में री-अपीयर की परीक्षाएं चल रही हैं। इसके अलावा रेगुलर कक्षाएं भी लग रही हैं।
अधिकांश कक्षाओं के कोर्स पूरा हो चुके हैं। इसलिए भी कॉलेज के विद्यार्थियों को अपने दोस्तों के साथ डिपो में वक्त बिताने का पूरा मौका मिल रहा है।
डिपो में बैठने का कारण पूछने पर एक छात्रा ने कहा कि ऐसा नहीं कि शहर मेें घूमने के लिए कोई जगह नहीं है। लेजर वैली, मॉल्स और किंगडम ऑफ ड्रीम्स जैसे मशहूर पिकनिक स्पॉट हैं, लेकिन वहां रुपये खर्च करने पड़ते हैं, जबकि डिपो में दोस्तों के समोसे और चने आदि से ही काम चल जाता है।
यहां बात करना होता है आसान
युवाओं से इस नए स्पॉट की खासियत जानने के लिए जब उनसे बात करने की कोशिश की गई तो अधिकांश ने मना कर दिया। वहीं कुछ लोगों ने साफ कहा कि जेब में पैसे नहीं हैं।
दोस्त के साथ बात करनी है, घर वाले ज्यादा देर तक फोन पर बात नहीं करने देते हैं, इसलिए यहां बैठक कर बात करना अधिक आसान है। जब बस आएगी, चले जाएंगे।
बस अड्डे पर कोई युवा सामान्य माहौल को किसी भी तरह प्रभावित न करे, इसके लिए स्टाफ इन पर नजर रखता है। किसी भी स्थिति में कुछ अप्रिय होने पर युवाओं को डिपो से बाहर करने का निर्देश दिया गया है।
-कृपाल सिंह, डिपो ड्यूटी इंस्पेक्टर