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Delhi: आशंका और बेचैनी से घिरे लाखों लोगों को राहत, यमुना डूब क्षेत्र की 92 कॉलोनियों पर नहीं चलेगा बुलडोजर

Wed, 10 Jun 2026 06:20 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

ध्वस्तीकरण के अंदेशे के बीच मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मंगलवार को दिल्ली सचिवालय में बुलाई गई बैठक में यह  जानकारी दी। 
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बाढ़ क्षेत्र में बसे घर... - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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यमुना ओ-जोन क्षेत्र (डूब क्षेत्र) में बसी कॉलोनियों और गांवों में फिलहाल बुलडोजर नहीं चलेगा। ध्वस्तीकरण के अंदेशे के बीच मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मंगलवार को दिल्ली सचिवालय में बुलाई गई बैठक में यह  जानकारी दी। 

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उन्होंने कहा कि ओ-जोन में स्थित पुरानी आबादियों और पहले से बने निर्माणों पर किसी प्रकार की विध्वंस कार्रवाई नहीं होगी। दिल्ली सरकार ने कहा कि वह इन कॉलोनियों में रहने वाले करीब 15 लाख लोगों के साथ खड़ी है और उनके हितों की रक्षा के लिए हर संभव प्रयास करेगी।

बैठक में मौजूद अधिकारियों ने बताया कि ओ-जोन क्षेत्र में लगभग 91-92 अनधिकृत कॉलोनियां और एक दर्जन पुराने गांव स्थित हैं, जहां करीब 15 लाख लोग निवास करते हैं। बैठक में जनप्रतिनिधियों ने कहा कि क्षेत्र में लगाए गए सरकारी नोटिस बोर्डों की वजह से लोगों में भ्रम और भय का माहौल है।  बैठक के बाद आयोजित संयुक्त प्रेस वार्ता में सांसद रामवीर सिंह बिधूड़ी और मनोज तिवारी ने कहा कि केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार और भाजपा संगठन इस विषय को लेकर पूरी तरह संवेदनशील हैं। बिधूड़ी ने बताया कि संबंधित कॉलोनियों को 24 मार्च 2008 को नियमित किया गया था और उस समय वे एफ-जोन में आती थीं। 
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बाद में 10 अगस्त 2010 को तत्कालीन केंद्र और दिल्ली की कांग्रेस सरकारों ने इन क्षेत्रों को ओ-जोन में शामिल कर दिया। उन्होंने दावा किया कि 2013 में डीडीए ने इन इलाकों को पुनः एफ-जोन में लाने के लिए ड्राफ्ट नोटिफिकेशन भी जारी किया था, लेकिन आज तक अंतिम अधिसूचना जारी नहीं हो सकी।

नए व चल रहे निर्माण पर है हाईकोर्ट को चिंता 
हाईकोर्ट के आदेशों और उपलब्ध सरकारी अभिलेखों के अध्ययन से यह स्पष्ट होता है कि अदालत की चिंता नए और चल रहे निर्माणों को लेकर है, न कि वर्षों से बसी कॉलोनियों या पुराने निर्माणों को लेकर। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग इस स्थिति का फायदा उठाकर निवासियों को डराने के साथ-साथ अवैध निर्माण भी करवा रहे हैं। 

स्पष्टीकरण मांगा
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने डीडीए अधिकारियों से इस संबंध में स्पष्टीकरण मांगा और कहा कि हाईकोर्ट ने पहले से बने निर्माणों पर कोई टिप्पणी नहीं की है। अदालत की ओर से उठाए गए सवाल मुख्य रूप से नए निर्माणों से जुड़े हैं इसलिए डीडीए को उसी भावना के अनुरूप कार्रवाई करनी चाहिए। 

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