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Delhi NCR News: शालीमार बाग में चला बुलडोजर, रोड नंबर-320 के लिए 143 अवैध निर्माण हटाने की कार्रवाई शुरू

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सुप्रीम कोर्ट से लोगों को राहत नहीं मिलने के बाद प्रशासन ने शुरू की कार्रवाई, सड़क चौड़ीकरण परियोजना को मिली हरी झंडी
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प्रभावित पात्र परिवारों को 3 लाख रुपये सहायता और सावदा घेवरा में अस्थायी आवास की पेशकश

अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखने के बाद रविवार सुबह शालीमार बाग के हैदरपुर इलाके में बड़े स्तर पर अतिक्रमण हटाओ अभियान शुरू हुआ। रोड नंबर-320 के चौड़ीकरण के लिए प्रशासन ने 143 अवैध निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की। जिला प्रशासन ने कहा कि यह अभियान अदालत के आदेशों के पालन में चलाया जा रहा है और सड़क परियोजना के लिए जरूरी जमीन खाली होने तक जारी रहेगा।

मध्य-उत्तर जिले के डीएम एसएस परिहार ने बताया कि जिस जमीन पर कार्रवाई की जा रही है, वह अधिग्रहित सरकारी भूमि है और डीडीए के मास्टर प्लान में सार्वजनिक सड़क के रूप में दर्ज है। यह भूमि रोड नंबर-320 के निर्धारित राइट ऑफ वे का हिस्सा है। सड़क शालीमार बाग रेलवे अंडर ब्रिज को आउटर रिंग रोड से जोड़ती है और उत्तर-पश्चिम दिल्ली के कई महत्वपूर्ण इलाकों के लिए प्रमुख यातायात मार्ग मानी जाती है।
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यातायात जाम और आपात सेवाओं पर पड़ रहा था असर : प्रशासन के मुताबिक सड़क के दोनों ओर हुए अतिक्रमण के कारण इसकी चौड़ाई काफी कम हो गई थी। इससे रोजाना ट्रैफिक जाम की स्थिति बनती थी और एम्बुलेंस, फायर ब्रिगेड व अन्य आपातकालीन वाहनों की आवाजाही भी प्रभावित होती थी। अधिकारियों का कहना है कि सड़क चौड़ी होने से लाखों लोगों को सीधा फायदा मिलेगा।

143 अवैध निर्माण मिले, 10.5 मीटर जमीन खाली कराई जाएगी : जनवरी 2026 में डीडीए, राजस्व विभाग, भूमि एवं भवन विभाग तथा पीडब्ल्यूडी ने संयुक्त सर्वे कराया था। टोटल स्टेशन मेथड (टीएसएम) तकनीक से हुए सर्वे में 30 मीटर के निर्धारित राइट ऑफ वे के भीतर 143 पक्के अवैध निर्माण पाए गए। वर्तमान में करीब 19.5 मीटर सड़क मौजूद है, जबकि शेष 10.5 मीटर हिस्सा अतिक्रमण की वजह से बाधित है। डीएम ने कहा कि प्रशासन ने न्यूनतम विस्थापन की नीति अपनाई है। भले ही पूरा राइट ऑफ वे 30 मीटर का है, लेकिन फिलहाल केवल उतनी जमीन खाली कराई जा रही है जितनी सड़क चौड़ीकरण के लिए तत्काल जरूरी है।

चार दशक पहले पूरा हो चुका था भूमि अधिग्रहण : प्रशासन के मुताबिक संबंधित भूमि का अधिग्रहण 1959 और 1961 की अधिसूचनाओं के तहत शुरू हुआ था। 1966 में अधिग्रहण की घोषणा हुई और 1980 में अवार्ड जारी किए गए। जुलाई 1980 में जमीन का कब्जा ले लिया गया था और 1981 में मुआवजे की राशि भी जमा करा दी गई थी। अधिकारियों का कहना है कि कानूनी रूप से भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया कई दशक पहले पूरी हो चुकी थी।

हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक प्रशासन को मिली राहत : कार्रवाई के खिलाफ कुछ निवासियों ने दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उन्होंने भूमि अधिग्रहण को निरस्त घोषित करने और प्रशासनिक कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की थी। हालांकि 6 अप्रैल 2026 को हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर दी। इसके बाद पुनर्विचार याचिका भी 18 मई को खारिज हो गई।

प्रभावित परिवारों के लिए राहत पैकेज : डीएम एसएस परिहार ने बताया कि सरकार ने प्रभावित पात्र परिवारों के लिए राहत पैकेज भी घोषित किया है। इसके तहत प्रत्येक पात्र परिवार या इकाई को 3 लाख रुपये की एकमुश्त एक्स-ग्रेशिया सहायता दी जाएगी।
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जनहित और मानवीय दृष्टिकोण से कार्रवाई जरूरी : प्रशासन का कहना है कि एक ओर अदालत के आदेशों का पालन किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर प्रभावित परिवारों की परेशानियों को कम करने का भी प्रयास किया जा रहा है।
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