inspector subodh kumar
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शहीद इंस्पेक्टर के बैचमेट व दोस्त इंस्पेक्टर समरजीत सिंह ने बताया कि दोनों 1998 बैच के सब इंस्पेक्टर थे। वह 2013 से गौतमबुद्ध नगर जिले में थे और वर्ष 2014 में उनकी पोस्टिंग सेक्टर-20 थाने में एसएसआई के पद पर थी। इसके बाद वह कुछ समय के लिए सेक्टर-58 थाने में एसएसआई रहे।
इसके बाद पहली बार 2015 में ही थाना बादलपुर का चार्ज मिला। इसके कुछ समय बाद ही वह थाना जारचा प्रभारी बने थे। वर्ष 2016 में प्रमोशन मिला और वह मथुरा के वृंदावन थाना प्रभारी बने। उनका परिवार ग्रेनो वेस्ट के गौड़ सिटी में फर्स्ट एवेन्यू में रहता है।
परिवार में पत्नी और दो बेटे हैं। बड़ा बेटा बीटेक की पढ़ाई कर रहा है। जबकि छोटा 12वीं का छात्र है। गौड़ सिटी में शिफ्ट होने से पहले सुबोध का परिवार नोएडा और गाजियाबाद में रहता था।
सोमवार को मौत की खबर सुनते ही परिवार में कोहराम मच गया। आनन फानन में पूरा परिवार बुलंदशहर के लिए रवाना हो गया। वहीं एटा से भी उनके रिश्तेदार बुलंदशहर पहुंच गए।
बुलंदशहर के स्याना कोतवाली में दंगाइयों की गोली लगने से शहीद हुए प्रभारी निरीक्षक सुबोध कुमार की तैनाती बिसाहड़ा कांड के दौरान थी। सुबोध जारचा कोतवाली प्रभारी थे और उन्होंने बिसाहड़ा कांड की जांच की थी।
बिसाहड़ा में इकलाख हत्याकांड कांड के दौरान सुबोध कुमार जारचा कोतवाली प्रभारी रहे थे और लगभग आठ माह का कार्यकाल उनका जारजा में रहा है। इकलाख की मौत के बाद अगली सुबह 29 सितंबर 15 को ऊंचा अमीरपुर में एनटीपीसी के पास भी भड़की भीड़ और लाठीचार्ज के समय वह मौजूद रहे थे और उस दौरान पुलिस ने वहां मौजूद मस्जिद की सुरक्षा की थी।
इसी के चलते वह बिसाहड़ा कांड होने के बाद भी करीब छह माह तक जारचा थाने में रहे। ऊंचा अमीरपुर मोड़ पर लाठीचार्ज व फायरिंग के दौरान ऊंचा अमीरपुर निवासी राहुल यादव के गोली लगने का आरोप भी सुबोध कुमार पर रहा था जिसकी मजिस्ट्रेट जांच चल रही है।
मजिस्ट्रेटी जांच में थे गवाह
ग्रामीणों के अनुसार 28 सितंबर 2015 को बिसाहड़ा गांव मे इकलाख की भीड़ ने पीट-पीट कर हत्या कर दी गई थी। इस दौरान मौके पर पर पाया गया मांस और फ्रिज में रखे मांस को अपनी देख रेख में पहले जिला पशु केंद्र और बाद में मथुरा स्थित जांच लैब में भेजा था। इस दौरान मजिस्ट्रेटी जांच में वह गवाह भी थे।
सुबोध कुमार के शहीद हो जाने से इकलाख केस में झटका लगा है। इकलाख के घर से मिले मांस को उन्होंने ही बरामद किया था। उनकी मौत का बिसाहड़ा के लोगों को बेहद दुख है।- संजय राणा, बिसाहड़ा निवासी