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शाहबेरी मामला: बड़े बिल्डरों के फेल होने से छोटों को मिला मौका, सस्ते फ्लैट के नाम पर दे रहे ये ऑफर

Sat, 21 Jul 2018 08:16 PM IST
ब्यूरो,अमर उजाला, नोएडा
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Building Collapse
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नोएडा-ग्रेटर नोएडा में जब रियल एस्टेट बाजार अपने उफान पर था। तब बड़ी संख्या में लोगों ने यहां निवेश किया। लेकिन पिछले चार से पांच वर्ष के दौरान फ्लैट का पजेशन देने में ज्यादातर बड़े बिल्डर फेल होते गए। वहीं इसी दौरान छोटे बिल्डरों ने इमारतों का निर्माण कर मौके का फायदा उठाया। कम समय और कम पैसे में मकान दिलाकर लोगों का दिल भी जीता। अगर शाहबेरी जैसी घटना नहीं होती तो कोई भी इन पर कभी उंगली नहीं उठाता।

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दरअसल, नोएडा के बाहरी क्षेत्रों, ग्रेटर नोएडा एक्सटेंशन, ग्रेटर नोएडा वेस्ट में किसानों की जमीनों पर बड़ी संख्या में इमारतें खड़ी करने की योजना बनी। लोगों ने जमकर पैसा लगाया। यहां बिल्डरों ने बड़े-बड़े वादे किए। लेकिन वादों के बावजूद अभी तक मकान नहीं दिला पाए।

उसी दौरान नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद सहित अन्य क्षेत्रों में 15 से 25 लाख में तीन से चार मंजिला इमारतों में बिल्डर फ्लैट का चलन बढ़ गया। यहां कई क्षेत्रों में बिल्डरों ने योजना के मुताबिक सही मकान बनाए। लेकिन लालच में बिल्डर मकानों को और ऊंचा करते चले गए और जानबूझकर खरीदारों की जान-जोखिम से डालते गए।

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छह महीने में भी की फ्लैट की डिलीवरी
ऐसे फ्लैटों में रह रहे खरीदारों की मानें तो छह महीने में भी बिल्डरों ने ऐसे फ्लैटों की डिलीवरी की। उनकी मानें तो इतने कम समय में फ्लैट की डिलीवरी से विश्वास बढ़ गया। इस वजह से दूसरे अन्य लोग भी आकर्षित होते गए।

बड़े बिल्डरों से उठ गया था विश्वास
ग्रेनो वेस्ट, ग्रेनो और आसपास के क्षेत्रों में 50 लाख रुपये से एक करोड़ रुपये देकर भी लोगों को फ्लैट का पजेशन नहीं मिल रहा था। ऐसे में कम पूंजी वाले खरीदारों को लगा कि अच्छा हुआ कि उन्होंन नामी बिल्डरों के यहां निवेश नहीं किया, नहीं तो वह भी फंस जाते। ऐसे में निवेश के लिए उनको दूसरे तरीके के तौर पर उन्होंने बिल्डर फ्लैटों की ओर देखना शुरू किया। जिससे अपेक्षाकृत कम बजट में फ्लैट देने का दावा करने वाले बिल्डरों को फलने फूलने का मौका मिल गया।
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