कोरोना के कारण अप्रैल माह में शहरी बेरोजगारी दर बढ़कर 31 फीसदी तक पहुंच गई थी। यही कारण है कि अनलॉक 1.0 में सभी सरकारों का ध्यान रोजगार स्तर को सुधारने पर लग गया है।
लेकिन निर्माण क्षेत्र में आई भारी गिरावट इस राह में रोड़े अटका रही है। अप्रैल-जून की तिमाही में कोरोना के कारण हुए लॉकडाउन के कारण नए निर्माण की दर दो फीसदी रह गई है।
इस दौरान फ्लैट्स-रिहायशी मकानों की बिक्री में भी 81 फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि अगर निर्माण क्षेत्र में सुस्ती इसी प्रकार बनी रही तो बेरोजगारी और आर्थिक मंदी को संभालना मुश्किल हो जाएगा।
दिल्ली-एनसीआर में नहीं बिक रहे फ्लैट्स
दिल्ली-एनसीआर एरिया में निर्माण क्षेत्र में जुटे रजनीश गुप्ता के मुताबिक नोएडा-गाजियाबाद में निर्माण क्षेत्र बेहद सुस्त दौर से गुजर रहा है। पहले से तैयार फ्लैट्स की बिक्री नहीं हो रही है।
इसे देखते हुए बिल्डर्स ने नए प्रोजेक्ट्स में पैसा लगाना बंद कर दिया है। इसकी वजह से निर्माण क्षेत्र में रोजगार की संभावनाओं को भी भारी चोट पहुंची है।
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक निर्माण क्षेत्र के तेज होने से सीधे तौर पर 50 औद्योगिक क्षेत्रों को रफ्तार मिलती है। इसमें सीमेंट, स्टील, कलर इंडस्ट्री, ईंट उद्योग, कोयला उद्योग, फर्नीचर उद्योग, ट्रांसपोर्ट उद्योग, इलेक्ट्रॉनिक्स, स्लेक्ट्रिकल और अन्य उद्योग शामिल हैं।
इसके आलावा अप्रत्यक्ष तौर पर अनेक उद्योगों के चीजों की मांग में भी बढ़ोतरी होती है। लेकिन निर्माण क्षेत्र में मंदी के कारण इनमें भी सुधार की कोई गुंजाइश नजर नहीं आती।
उन्होंने बताया कि कोरोना काल में अन्य क्षेत्रों के लोगों की नौकरियों पर भी आंच आई है। जब तक लोगों की आय में निश्चित सुधार नहीं होता, तब तक एनसीआर एरिया में इस क्षेत्र में सुधार की उम्मीद नहीं की जा सकती।
हालांकि, नोएडा, गाजियाबाद में यूपी सरकार के बड़े प्रोजेक्ट्स लगाने की संभावनाओं के बीच इस क्षेत्र में तेजी आने की उम्मीद की जा रही है।
असंगठित निर्माण मजदूर संघ के प्रमुख बादल खान के मुताबिक दिल्ली-एनसीआर एरिया में अंसगठित निर्माण क्षेत्र में न्यूनतम 20 हजार श्रमिक काम करते हैं। लेकिन मार्च में ही बिल्डर्स ने उनसे पल्ला झाड़ लिया था।
उन्हें अपनी व्यवस्था अपने स्तर पर देख लेने के लिए कह दिया गया। अब ज्यादातर श्रमिक अपने गांव लौट गये हैं। निर्माण में अभी भी कोई शुरुआत होती नहीं दिख रही है, जिसके चलते अब उनके लौटने की भी कोई उम्मीद नहीं है।
एनोरोक रिसर्च की एक रिपोर्ट के मुताबिक अप्रैल, मई, जून की तिमाही में नए प्रोजेक्ट्स लांच होने में 98 फीसदी की गिरावट आई है। इस दौरान देश के टॉप सात शहरों में केवल चार प्रोजेक्ट शुरू किए गए।
इनमें दो बेंगलुरु, एक पुणे और एक कोलकाता में शुरू किए गए हैं। हालांकि, जनवरी से मार्च की तिमाही को जोड़कर अब तक कुल 1390 यूनिट्स की शुरुआत हो चुकी है।
इसी तिमाही के दौरान तैयार रिहायशी मकानों/फ्लैट्स की बिक्री में 81 फीसदी की गिरावट आई है। इस तिमाही में देश के टॉप सात शहरों में केवल 12,720 यूनिट बेचे गये हैं, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि के दौरान 68,600 रिहाइशी मकानों की बिक्री हुई थी।
जिन यूनिट्स की बिक्री हुई है, उनमें से 52 फीसदी अकेले मुंबई और उसके आसपास के इलाके और बेंगलुरू में हुई है। दिल्ली-एनसीआर जैसी एरिया में तैयार फ्लैट्स की बिक्री में भारी गिरावट दर्ज की गई है।