एनजीटी के आदेश के बाद 14 अगस्त 2013 से 28 अक्तूबर 2013 तक ओखला पक्षी विहार के 10 किलोमीटर के दायरे में आने कुछ बिल्डरों के प्रोजेक्ट रुक गए थे। उस दौरान 77 दिन तक प्रोजेक्ट रुके रहने के बाद काम दोबारा शुरू हुआ था। इस पीरियड को प्राधिकरण ने जीरो पीरियड माना है और इस अवधि के लिए बिल्डरों को ब्याज में छूट का लाभ देगा। इसके लिए करीब 180 करोड़ रुपए का लाभ बिल्डरों को मिलने की संभावना है। करीब 20 बिल्डर प्रोजेक्ट को छूट का लाभ मिलेगा।
दरअसल, 2013 में एनजीटी ने ओखला पक्षी विहार के 10 किलोमीटर के दायरे को ईको सेंसेटिव जोन घोषित करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए सभी निर्माण पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी थी। इसके बाद 77 दिन तक काम रुके रहे। कई बिल्डर इस दौरान काम रुके रहने को प्रोजेक्ट में देरी की वजह बताते रहे। यही नहीं उन्होंने प्राधिकरण पर दबाव बनाते हुए इस अवधि को जीरो पीरियड घोषित करते हुए ब्याज में छूट देने की भी मांग की थी। प्राधिकरण ने भी उनसे इस बाबत आवेदन करने को कहा था।
विचार मंथन के बाद 20 प्रोजेक्टों को जीरो पीरियड का लाभ देने का फैसला लिया गया। हालांकि इस अवधि में किस तरह की छूट मिलेगी। इस पर संशय बना हुआ है। चूंकि बिल्डरों का कहना था कि इस अवधि में किसी तरह का निर्माण कार्य नहीं चल रहा था। लिहाजा इस पर लगाए गए सभी ब्याज माफ किए जाएं। वहीं चर्चा यह भी है कि इस अवधि में किश्त जमा नहीं करने पर जो 3 प्रतिशत की पेनाल्टी लगाई गई है। उसको माफ करने का फैसला लिया गया है। प्राधिकरण का वित्त विभाग इस फैसले के बाद लेखा जोखा कर रहा है। इसके बाद अंतिम रूप से इस बात का फैसला हो जाएगा कि बिल्डरों को किस मद में और कितनी छूट मिल रही है।
इनको मिलेगा जीरो पीरियड का लाभ
सेक्टर-124 का एटीएस हाइट्स, सेक्टर-124 लॉजिक्स बिल्डकॉन, सेक्टर-94 सुपरटेक, सेक्टर-105 लॉजिक्स एस्टेट प्राइवेट लिमिटेड, सेक्टर-105 लॉजिक्स डेवलपर्स, सेक्टर-32 लॉजिक्स बिल्डटेक प्राइवेट लिमिटेड, सेक्टर-98 थ्रीसी डेवलपर्स, सेक्टर-74 अजनारा, सेक्टर-74 सुपरटेक सहित 20 प्रोजेक्टों को लाभ मिलेगा।