अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। पटियाला हाउस कोर्ट ने ग्रेटर नोएडा की हाउसिंग परियोजना से जुड़े धोखाधड़ी मामले में आरोपी बिल्डर राहुल चमोला की जमानत रद्द कर दी। ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट अंकित गर्ग ने कहा कि आरोपी ने बार-बार जमानत की शर्तों का उल्लंघन किया, अदालत के आदेशों का पालन नहीं किया और मिली राहत का दुरुपयोग किया।
अदालत के अनुसार, दिसंबर 2023 में जमानत मिलने के बाद भी राहुल चमोला कई सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से पेश नहीं हुआ। उस पर जुर्माना लगाया गया, लेकिन उसने समय पर राशि भी जमा नहीं की। एक अवसर पर उसकी गैरहाजिरी के कारण अदालत को जमानती वारंट जारी करना पड़ा। जांच अधिकारी ने भी अदालत को बताया कि कई प्रयासों के बावजूद आरोपी का पता नहीं चल सका। बाद में वह जांच में शामिल तो हुआ, लेकिन बीच में ही जांच छोड़कर चला गया।
कोर्ट ने आदेश में कहा कि पिछले दो वर्षों में आरोपी को कई अवसर, चेतावनियां और जुर्माने के बावजूद उसके रवैये में कोई सुधार नहीं आया। इससे स्पष्ट है कि उसने जानबूझकर जमानत की शर्तों का उल्लंघन किया। इसी आधार पर अदालत ने उसकी जमानत रद्द कर दी। मामला ग्रेटर नोएडा के सेक्टर-10 स्थित 'वनलीफ ट्रॉय' हाउसिंग प्रोजेक्ट से जुड़ा है। आरोप है कि बिल्डर ने फ्लैट दिलाने के नाम पर खरीदारों से धन लिया, लेकिन न फ्लैट दिए और न परियोजना पूरी की। बाद में परियोजना का नाम बदलकर 'रिनोन्ड' कर नए निवेशकों को भी आकर्षित किया गया। इससे घर खरीदने वाले कई लोगों को आर्थिक नुकसान हुआ।