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7 साल से तेजेंद्र खन्ना ही हैं दिल्ली के उपराज्यपाल!

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दिल्ली में भाजपा की सरकार बनवाने के लिए प्रयास करने और चुनावों से दूर भागने के आरोप झेलने वाले उपराज्यपाल नजीब जंग शायद को दिल्ली विधानसभा की वेबसाइट उपराज्यपाल नहीं मानती। वेबसाइट को देखने से तो ऐसा ही महसूस होता है।
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दिल्ली में चुनाव कराने से कई महीनों के लिए विकास रुक जाने की बात कह कर आम आदमी पार्टी के निशाने में आए उपराज्यपाल नजीब जंग को ये जानकर आश्चर्य होगा कि दिल्ली विधानसभा की वेबसाइट पर उन्हें अब तक जगह नहीं मिल पाई है।

वेबसाइट देखने पर पता चलता है कि उपराज्यपालों की लिस्ट से उनका नाम गायब है। यही नहीं, दिल्ली असेंबली की वेबसाइट http://delhiassembly.nic.in में और भी ऐसी कई खामियां हैं जो आपको हैरान कर देंगी।
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सबसे बड़ी चौंकाने वाली बात से है कि इस वेबसाइट पर अभी भी दिल्ली के पूर्व उपराज्यपाल तेजेंदर खन्ना का नाम मौजूदा उपराज्यपाल के तौर पर दिखाया जा रहा है।
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कहीं आपकी नजर भी न खा जाए धोखा

साल 2013 में 9 जुलाई को दिल्ली के 20वें उपराज्यपाल पद का कार्यभार संभालने वाले नजीब जंग का नाम दिल्ली विधानसभा की वेबसाइट में न होना बड़े आश्चर्य की बात है। वेबसाइट पर मौजूद फोटो गैलरी के ऑप्‍शन में क्लिक करने के बाद उपराज्यपालों की लिस्ट सामने आती है, लेकिन इसमें से मौजूदा उपराज्यपाल नजीब जंग का नाम गायब है।

एलजी के तौर पर एक साल से भी ज्यादा का समय बिता चुके जंग की जगह पर अभी भी तेजेंदर खन्ना को मौजूदा उपराज्यपाल के रूप में दिखाया जा रहा है। हालांकि वेबसाइट के मुख्य पेज पर वर्तमान उपराज्यपाल नजीब जंग का संदेश दिया गया है।

राजनीतिक संकट से जूझ रही देश की राजधानी दिल्ली की सरकार के तकनीकी रूप से पिछड़े होने से तमाम लोगों को पिछले एक साल से गलत जानकारी मिल रही है।

बता दें कि वर्तमान उपराज्यपाल नजीब जंग से पहले इस पद पर तेजेंदर खन्ना थे। उन्होंने 2007 में यह पद संभाला था और 2013 तक इस पर बने रहे। वह राजधानी के 19वें एलजी थे।
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3 सांसद वेबसाइट पर अभी हैं विधायक

दिल्ली विधानसभा की वेबसाइट पर एक और बड़ी खामी लगातार दिख रही है, वह है विधायकों की संख्या। दिल्ली विधानसभा में मौजूदा समय में कुल 67 विधायक हैं जबकि वेबसाइट पर अभी भी 70 विधायकों की लिस्ट चल रही है।

दरअसल, लोकसभा चुनाव में जीत हासिल करने के बाद भाजपा के तीन विधायकों, डॉ. हर्षवर्धन, रमेश बिधूड़ी और प्रवेश वर्मा ने विधायक पद से इस्तीफा दे दिया था लेकिन तीन महीने से ज्यादा का वक्त बीतने के बाद भी दिल्‍ली विधानसभा की वेबसाइट पर वे अभी भी विधायक ही हैं।

सरकार की इस कार्यप्रणाली से लोगों को भ्रामक जानकारी मिल रही है। एक ही व्यक्ति सांसद और विधायक दोनों पदों पर एक साथ कैसे हो सकता है?

दिल्ली असेंबली की वेबसाइट देखने के बाद इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है कि इसके कर्ताधर्ता कितने सजग और जागरूक हैं।
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