केन्द्र सरकार के आम बजट के साथ ही दिल्ली का बजट भी बृहस्पतिवार को पेश होगा। पन्द्रह साल से कांग्रेस सरकार की अगुवाई वाले बजट पर राष्ट्रपति शासन में भाजपा के विजन की झलक दिख सकती है।
लंबित योजनाओं की सूची बनाकर कांग्रेस शासन के कार्यों को दिखाने के साथ ही भविष्य में होने वाले दिल्ली विधानसभा चुनाव में मतदाताओं को लुभाने वाले वायदे भी दिख सकते हैं।
वोटरों को लुभाने के लिए इस बजट में कई अहम फैसले हो सकते हैं।
महंगाई की चोट पर सब्सिडी का मरहम?
सूत्र बताते हैं कि महंगाई की मार झेल रही जनता को बिजली पर मिलने वाली सब्सिडी बहाल करके कुछ राहत दी जा सकती है। राहत कितनी होगी, अभी यह तय नहीं है।
भाजपा के विधायक भी पार्टी हाईकमान को बता चुके हैं कि बिजली सब्सिडी हटाए जाने से महंगाई अधिक दिख रही है। ऐसे में शुरुआती 200 यूनिट तक 1.90 रुपये और उससे आगे की यूनिट पर 80 पैसे की सब्सिडी दी जा सकती है।
हालांकि एक प्रस्ताव यह भी है कि 200 यूनिट तक 1.20 रुपये और उससे ऊपर 400 यूनिट तक खर्च पहुंचने पर पूरे बिल पर प्रति यूनिट 80 पैसे की सब्सिडी दी जाए।
इस बजट में होंगे कई अहम फैसले
दिल्ली सरकार के सूत्र बताते हैं कि वैल्यू एडेड टैक्स (वैट), सर्किल रेट, वाहन रजिस्ट्रेशन टैक्स बढ़ाने को लेकर कोई कवायद नहीं है।
उपराज्यपाल नजीब जंग की तरफ से विभागों को संकेत मिले हैं कि जब नई सरकार दिल्ली में आएगी तभी जनता पर कोई बोझ डालने या नहीं डालने का फैसला होगा।
वहीं मेट्रो रेल, फ्लाईओवर, स्कूलों की संख्या बढ़ाने के प्रोजेक्ट आगे बढ़ाने के अलावा अनधिकृत कॉलोनियों में विकास और ड्रेनेज के मास्टर प्लान पर भी खर्च का प्रावधान किया जा सकता है।
केन्द्रीय बजट में हिस्सेदारी बढ़ाने की उम्मीद
केन्द्रीय बजट से दिल्ली पुलिस के आधुनिकीकरण, महिला सुरक्षा फंड, केन्द्रीय बजट में हिस्सेदारी बढ़ने की उम्मीद है।
जवाहर लाल नेहरु नवीकरण योजना की पुरानी राशि खर्च नहीं होने से गरीबों के लिए मकान व पार्किंग जैसी योजनाओं के लिए मिलने वाली राशि में कटौती हो सकती है।
इन सबके बीच वर्षों से लंबित केन्द्रीय बजट में हिस्सेदारी बढ़ाए जाने की उम्मीद दिल्ली सरकार के अधिकारियों को है। अभी सिर्फ 325 करोड़ रुपये मिलते हैं।