केंद्र की मोदी सरकार रेल बजट को अंतिम रूप दे रही है। पिछले रेल बजट की तरह ही इस बार भी वादों का पिटारा दो दिनों बाद सामने होगा। लेकिन, ट्रेन की लेटलतीफी की तरह ही पिछले कई बजटों की योजनाएं आज भी अटकी हुई हैं।
दिल्ली-एनसीआर के यात्री कई सुविधाओं से आज भी महरूम है। वर्ल्ड क्लास स्टेशन बना कर यात्रियों को बेहतर सुविधा देने की बात हर बजट में हुई, लेकिन आदर्श स्टेशन की सुविधा से भी यात्री वंचित रह गए।
आरओ वाटर देने की बात की गई, लेकिन यात्री आज भी बोतल बंद पानी पीने को ही मजबूर हैं। बेहतर साफ-सफाई का वायदा भी सभी प्लेटफार्म पर नहीं दिखा। लोकल ट्रेन व प्लेटफार्म पर शौचालय की कमी आज भी यात्रियों को खटकती है।
गतिमान ट्रेन चलाने की बात हो रही है, लेकिन लोकल ट्रेन को अभी तक फास्ट ट्रैक नहीं मिला। सीएनजी से ट्रेन चलाने की बात हो रही है, लेकिन शटल ट्रेन आज भी डीजल इंजन से ही दौड़ रही है। प्रतिदिन 1127 ट्रेन दिल्ली मंडल से संचालित होती है और 21.54 करोड़ रुपये की आमदनी होती है। यात्रियों की बात करें तो इस मंडल में प्रतिदिन 15 लाख से अधिक यात्री सफर करते हैं।
वर्ल्ड क्लास तो दूर आदर्श स्टेशन वाली भी सुविधा नहीं
पिछले कई रेल बजट से राजधानी के स्टेशनों पर यात्रियों को वर्ल्ड क्लास सुविधा देने का सब्जबाग दिखाया जा रहा है। लेकिन, अभी तक स्टेशन यात्री फ्रेंडली तक नहीं हो सके हैं।
नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के मुख्य प्लेटफार्म की बात छोड़ दें तो निजामुद्दीन, पुरानी दिल्ली, आनंद विहार, सराय रोहिल्ला समेत कई स्टेशन पर आज भी सुविधाओं का अभाव है। कई छोटी योजनाएं भी लटकी हैं। यहां तक कि प्लेटफार्म पर शौचालय तक नहीं हैं।
स्वचालित सीढ़ियों से सभी प्लेटफार्म लैस नहीं हो सके। बिजवासन रेलवे स्टेशन अपना रूप तक नहीं ले सका। इस स्टेशन से पश्चिम भारत की तरफ की सभी ट्रेन के संचालन करने की योजना है। आनंद विहार स्टेशन से पूर्वांचल की तरफ जाने वाली ट्रेनों को शिफ्ट करने का काम भी पूरा नहीं हो सका। नई दिल्ली को छोड़ अन्य स्टेशन वाई-फाई से लैस नहीं हुए।
ट्रेन के खाने को लेकर आज भी शिकायतों का अंबार
बेहतर खाने के प्रबंध के लिए आईआरसीटीसी से ट्रेन में कैटरिंग का काम वापस लिया गया था, एक बार फिर इसे कैटरिंग सेवा देने की बात चल रही है। लेकिन बेहतर खाना यात्रियों को नहीं मिला।
बुक-ए-मील, रेडी टू ईट, ऑन लाइन बुकिंग सर्विस, ऑन डिमांड खाना मुहैया कराने का आश्वासन मिला। लेकिन, इसका लाभ भी सभी यात्रियों को नहीं मिल पा रहा है।
मोदी सरकार ने स्टेशनों पर आरओ वाटर पिलाने के सब्ज बाग दिखाए थे। कई ट्रेनों में भी आरओ लगने थे। आरओ वाटर तो दूर शुद्ध पेय जल भी यात्रियों को नहीं मिल रहा है। यह भी कहा गया था कि पेंट्री कार में खाना आरओ वाटर के प्रयोग से ही बनेगा। आज भी यात्री बोतल बंद पानी पीने को मजबूर हैं।
दिल्ली-एनसीआर में डीजल शटल ही चलते है
दिल्ली-एनसीआर में आज भी ज्यादातर डीजल शटल ही चलती हैं। जबकि, सीएनजी से ट्रेन चलाने की बात हो रही है। रेलवे का वादा था कि दिल्ली-रेवाड़ी, दिल्ली-सहारनपुर-मेरठ, दिल्ली-हापुड़ ट्रैक (गाजियाबाद के बाद) को जल्द ही इलेक्ट्रीफाइड किया जाएगा।
इलेक्ट्रिफिकेशन का काम तो चल रहा है, लेकिन यह योजना भी आधी दूरी तय कर हांफने लगी है। गाजियाबाद-मेरठ रूट पर ही 58 किलोमीटर इलेक्ट्रिफिकेशन का काम पूरा हो सका है। इस रूट पर ज्यादातर डीजल शटल सेवा ही लोकल पैसेंजरों को मिलती है।
देवालय नहीं शौचालय पर जोर देने की बात कही गई थी। साफ-सफाई की व्यवस्था तो पहले से तो बेहतर जरूर हुई है, लेकिन लोकल ट्रेन में अभी भी शौचालय की सुविधा नहीं है। जबकि लोकल ट्रेन से हजारों की तादाद में कामकाजी महिलाएं व पुरुष रोजाना यात्रा करते हैं। लेडीज स्पेशल लोकल ट्रेन की भी कमी यात्रियों को परेशान करती है। सभी प्लेटफार्म पर भी शौचालय की सुविधा भी नहीं है।
स्वास्थ्य सुविधा से भी वंचित रहे यात्री
यात्री डायग्नोस्टिक सेंटर खोलने का वादा रेलवे ने किया था। दिल्ली, गाजियाबाद, फरीदाबाद, साहिबाबाद समेत कई स्टेशनों के समीप इस तरह का सेंटर खुलना था।
लेकिन, यह योजना भी खटाई में ही है। इसी तरह स्टेशनों पर एंबुलेंस सुविधा, ट्रेन में डॉक्टरों की सुविधा देने का रेलवे को हाईटेक बनाने की कई योजनाएं हैं। ट्रेन में इंटरनेट की सुविधा, इंटरटेनमेंट की सुविधा देने की बात है।
लेकिन, दिल्ली मंडल से संचालित होने वाली 30 शताब्दी ट्रेन इस सुविधा से लैस नहीं हो सकी। इसी तरह इंटरनेट की सुविधा ट्रेन व स्टेशनों पर देने की बात की गई थी। लेकिन नई दिल्ली व एक राजधानी ट्रेन को छोड़ यात्री इस सुविधा से महरूम हैं।