आप और बीजेपी की तैयारियों के बीच मायावती की बहुजन समाज पार्टी ने भी राजधानी के चुनावों के लिए तैयारियां शुरु कर दीं। बसपा इस चुनाव में किसी भी प्रकार की कोई कमीं नहीं छोड़ना चाहती। इस वजह से पार्टी विधानसभा चुनावों के प्रत्याशियों का चयन भी बहुत सोच समझ कर करना चाहती है।
प्रत्याशियों की उम्मीदवारी के लिए बसपा ने एक चयन प्रक्रिया रखी है। इस प्रक्रिया में प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र से प्रत्याशियों के आवेदन और रिज्यूमे मांगे गये हैं।
बसपा की तरफ से विधानसभा का प्रत्याशी बनने के लिए प्रत्येक विधानसभा के पार्टी सदस्य अपनी उम्मीदवारी के लिए आवेदन कर सकते हैं। इस आवेदन प्रक्रिया की खास बात ये है कि आवेदन करने वाले कार्यकर्ता को अपने क्षेत्र की पांच समस्याएं भी बतानी होंगी।
पिछले विधानसभा चुनावों और लोकसभा में बेहतर प्रदर्शन ना होने की वजह से इस तरह की चयन प्रक्रिया रखी गयी है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक मिलने वाले आवेदनों में से बेहतर उम्मीदवारों का चयन पार्टी आलाकमान करेगी।
क्या कहते हैं पार्टी प्रदर्शन के आंकड़े
पार्टी के वरिष्ठ नेता कहते हैं कि हमने अपने जिलेवार कार्यकर्ताओं को जानकारी दे दी है। पार्टी के दिल्ली इकाई के अध्यक्ष एमएल तोमर के मुताबिक हम उन सीटों का विश्लेषण कर रहे हैं जिन पर हमारा प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा है। हम इस बार कमियों को दूर कर विधानसभा चुनाव मैदान में होंगे।
इसके अलावा हमने उन सीटों पर इस बार खास फोकस किया है जिन पर हमें मामूली अंतर से हार का सामना करना पड़ा था। तोमर कहते हैं कि हम दिल्ली विधानसभा चुनावों में इस बार बेहतर प्रदर्शन करेंगे। पार्टी चुनावों के लिए तैयार है। बसपा सुप्रीमों मायावती हमारे साथ हैं।
2008 के चुनावों में बहुजन समाज पार्टी का दिल्ली चुनावों में वोट शेयर 14.5 प्रतिशत था वहीं 2013 के विधानसभा चुनावों में ये घटकर 5.35 प्रतिशत रह गया। वहीं लोकसभा चुनावों में ये प्रतिशत महज 1.2 प्रतिशत का रह गया।
किस विधानसभा में क्या है स्थिति
पार्टी नरेला, सुल्तानपुर, तुगलकाबाद, और पालम विधानसभा सीटों को आशा के तौर पर देख रही है। गोकुलपुर, मुस्तफाबाद, रोहताश नगर, सीलमपुर, बाबरपुर, घोंडा, रोहिणी, भी वो सीट हैं जिन पर बहुजन समाज पार्टी अच्छा प्रदर्शन करती रही है।
बसपा के वरिष्ठ नेता के मुताबिक हमारा 2008 में वोटों का प्रतिशत 14.05 प्रतिशत था। आप के झूठे वादों की वजह से हमारा वोट खिसक गया। एक बार फिर हमारा वोटर हमारे पास आएगा।
दिल्ली के आने वाले चुनावों में बसपा ने मुस्लिम और दलित वोटों को लक्ष्य बनाया है। 2008 में बवाना, सुल्तानपुर, माजरा, मंगोलपुरी, विकासपुरी, पालम, नजफगढ़, मटियाला, त्रिलोकपुरी, कोंडली, और रोहिताश नगर से पार्टी को 20000 के आस-पास वोट मिले थे, लेकिन 2013 के विधानसभा और 2014 के लोकसभा चुनावों में ये वोट पार्टी से खिसकता नजर आया है।