लोकसभा चुनाव हारने के बाद बहुजन समाज पार्टी को शुक्रवार को दूसरा झटका जिला पंचायत में लगा। पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी बसपा के हाथ से निकल गई।
समाजवादी पार्टी के नेताओं ने अविश्वास प्रस्ताव लाकर अध्यक्ष पद से बसपा को उतार दिया। अविश्वास प्रस्ताव में बसपा समर्थक दो सदस्यों ने भी साथ दिया, वहीं भाजपा के एक सदस्य ने भी मतदान किया।
पिछले चुनावों में सांसद और जिला पंचायत अध्यक्ष बसपा के चुने गए थे। जिला पंचायत अध्यक्ष पद का चुनाव तब हुआ था जब प्रदेश में बसपा की सरकार थी। जिले की तीन विधानसभा सीटों में से दो पर बसपा के विधायक हैं। इस तरह जिले में एक तरह से बसपा का परचम था।
भाजपा के एक सदस्य ने भी दिया साथ
लोकसभा चुनाव में बसपा को न केवल सीट से हाथ धोना पड़ा, बल्कि पार्टी तीसरे नंबर पर चली गई। शुक्रवार को जिला पंचायत अध्यक्ष भी बसपा के हाथ से चला गया।
इसमें कुल 15 सदस्य हैं, जिनमें सपा के फकीर चंद नागर, बिजेंद्र भाटी, मोमीन, पुष्पा भाटी और रविंद्र भाटी हैं, लेकिन सपा का साथ 11 सदस्यों ने दिया। खास बात यह रही कि बसपा के दो सदस्यों ने भी अविश्वास प्रस्ताव में साथ दिया।
भाजपा के एक सदस्य ने अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया, जबकि एक सदस्य हरीश ठाकुर (भाजपा जिलाध्यक्ष) गैर हाजिर रहे। अब जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए राज्य सरकार तारीख तय करेगी। तब तक राज्य सरकार तीन सदस्यीय कमेटी तय कर देगी, जोकि जिला पंचायत का संचालन करेगी।